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Code : 191059
Date of publication : 21/12/2017 18:0
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इमाम अली अ.स. और हज़रत ज़हरा में समानताएं

..................... दोनों की इबादत की कोई मिसाल नहीं, जैसाकि इमाम सज्जाद अ.स. इमाम अली अ.स. की इबादत के बारे में फ़रमाते हैं कि इमाम अली अ.स. के जैसी इबादत कोई नहीं कर सकता (वसाएलुश-शिया, जिल्द 6, पेज 91) इसी तरह इमाम हसन अ.स. हज़रत ज़हरा स.अ. की इबादत के बारे में फ़रमाते हैं कि हज़रत ज़हरा स.अ. जैसी किसी की इबादत नहीं थी।


विलायत पोर्टल :  इमाम जाफ़र सादिक़ अ.स. फ़रमाते हैं कि अगर अल्लाह इमाम अली अ.स. को पैदा न करता तो कोई भी ऐसा नहीं था जिस से हज़रत ज़हरा स.अ. की शादी हो सकती। (अमाली शैख़ तूसी) इमाम अली अ.स. और हज़रत ज़हरा स.अ. में बहुत सारी समानताएं पाई जाती हैं जिनमें से कुछ को यहां पर पेश किया जा रहा है।
1. दोनो का वजूद नूरानी था।
2. दोनों के पास विशेष इल्म था, जैसाकि पैग़म्बर स.अ. ने इमाम अली अ.स. के लिए फ़रमाया, मेरी उम्मत में सबसे पहले इस्लाम लाने वाले इमाम अली अ.स. थे और सबसे ज़्यादा इल्म भी उन्हीं का था। (अमाली सदूक़, पेज 8) इसी तरह एक दिन हज़रत ज़हरा स.अ. इमाम अली अ.स. से कहती हैं कि ऐ अली (अ.स.) मेरे पास बैठिए मैं आपको अब तक जो दुनिया में हुआ है और जो हो रहा है उसके बारे में बताऊं। (अमाली सदूक़, पेज 8)
3. दोनो मासूम हैं, अल्लाह ने क़ुर्आन में आयते ततहीर में अहलेबैत अ.स. की पाकीज़गी का ऐलान किया है और इमाम अली अ.स. और हज़रत ज़हरा स.अ. दोनों अहलेबैत अ.स. में शामिल हैं।
4. दोनों की इबादत की कोई मिसाल नहीं, जैसाकि इमाम सज्जाद अ.स. इमाम अली अ.स. की इबादत के बारे में फ़रमाते हैं कि इमाम अली अ.स. के जैसी इबादत कोई नहीं कर सकता (वसाएलुश-शिया, जिल्द 6, पेज 91) इसी तरह इमाम हसन अ.स. हज़रत ज़हरा स.अ. की इबादत के बारे में फ़रमाते हैं कि हज़रत ज़हरा स.अ. जैसी किसी की इबादत नहीं थी। (बिहारुल अनवार, जिल्द 43, पेज 76)
5. दोनों की मोहब्बत सआदत तक पहुंचाने वाली है, जैसाकि पैग़म्बर स.अ. की इमाम अली अ.स. के बारे में हदीस है कि अगर सारे लोग इमाम अली अ.स. से मोहब्बत करते होते तो अल्लाह जहन्नम न बनाता (बिहारुल अनवार, जिल्द 92, पेज 19) इसी तरह इमाम सादिक़ अ.स. ने हज़रत फ़ातिमा ज़हरा स.अ. के नाम के बारे में फ़रमाया कि आप का नाम फ़ातिमा इसलिए है क्योंकि आप अपने शियों को जहन्नम से बचाएंगी। (बिहारुल अनवार, जिल्द 43,पेज 12)
6. दोनों के बेटों ने आप पर गर्व किया, जैसाकि इमाम हुसैन अ.स. नें आशूर के दिन जब अपने को पहचनवाया ताकि कल क़यामत में किसी के पास कोई बहाना न रहे तो आपने यह कह कर पहचनवाया कि मैं अली (अ.स.) और फ़ातिमा (स.अ.) का बेटा हूं। (बिहारुन अनवार, जिल्द 45, पेज 303)
7. दोनों के हक़ को छीना गया।
8. दोनों पर ज़ुल्म किया गया।
9. दोनों को उनके दौर में जैसा पहचानना चाहिए नहीं पहचाना गया।
10. दोनों अल्लाह की राह में शहीद हुए। 11. दोनों को रात के अंधेरे में दफ़्न किया गया।
12. दोनों क़यामत नें अल्लाह की बारगाह में शफ़ाअत करेंगे।
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