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Code : 191033
Date of publication : 20/12/2017 8:10
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क़ुद्स संकट पर आले सऊद की चुप्पी का राज़ ।

अगर आले सऊद फ़िलिस्तिनियों के अधिकारों के लिए चिंतित है तो वहां की जनता को अवैध राष्ट्र के विरुध्द धरना प्रदर्शन की अनुमति क्यों नहीं दे रहा? बहरैन की एक टीम ने जिस समय पूरे विश्व में ट्र्म्प के इस फ़ैसले का विरोध हो रहा था उसी समय क्यों क़ुद्स का दौरा किया? जबकि पूरी दुनिया जानती है कि बहरैन के आले ख़लीफ़ा सऊदी के इशारों के बिना छोटे से छोटा काम भी नहीं करते ! आले सऊद का फ़िलिस्तीन को किसी भी तरह का कोई समर्थन न होने पर एक और गवाह रायटर्स की वह रिपोर्ट है जिसमें कहा गया है कि पूरे विश्व में ट्र्म्प के क़ुद्स को इस्राईल की राजधानी घोषित करने वाले फ़ैसले पर आक्रोश के बावजूद अमेरिका ने यह फ़ैसला आले सऊद के साथ बातचीत के बाद ही लिया है।


विलायत पोर्टल :  सऊदी अरब अपने आप को इस्लामी देश होने विशेष कर वहां पर मुसलमानों के दो पवित्र शहर मक्का और मदीना होने के नाते फ़िलिस्तीनियों के अधिकारों का समर्थक कहता है और अवैध राष्ट्र इस्राईल से अपने हर तरह के संबंध का खंडन करता है, लेकिन ट्र्म्प द्वारा क़ुद्स को अवैध राष्ट्र इस्राईल की राजधानी घोषित करने के बाद सऊदी और इस्राईल के संबंध पूरी तरह से ज़ाहिर हो चुके हैं। क़ुद्स को इस्राईल की राजधानी घोषित करने और अपने दूतावास को वहां पर खोलने के पीछे अमेरिका की क्या चाल है इससे हट कर भी अगर देखा जाए तो आले सऊद की चुप्पी ने सभी इस्लामी देशों के मन में संदेह पैदा कर दिया है, जबकि यह ऐसी घटना है जिसने न केवल इस्लामी बल्कि ईसाई देशों को भी आक्रोशित कर दिया है। आले सऊद की ओर से इस घटना पर केवल यह कार्यवाही देखने को मिली कि उसने अरब लीग के विदेश मंत्रियों की क़ाहिरा मिस्र में होने वाली बैठक में हिस्सा लिया, उसके अलावा आले सऊद की ओर से छोटे से छोटा धरना प्रदर्शन तक नहीं हुआ, सवाल यह है कि अगर आले सऊद फ़िलिस्तिनियों के अधिकारों के लिए चिंतित है तो वहां की जनता को अवैध राष्ट्र के विरुध्द धरना प्रदर्शन की अनुमति क्यों नहीं दे रहा? दूसरा अहम सवाल जिस से सऊदी के फ़िलिस्तीनियों के झूठे समर्थन का सच सामने आता है वह यह कि क्यों अभी तक वहां पर जुमे की नमाज़ के ख़ुत्बे या और दूसरे किसी मज़हबी, सियासी प्रोग्राम मे इस मुद्दे पर चर्चा नहीं की? जबकि पूरी दुनिया के मुसलमानों ने जुमे की नमाज़ के ख़ुत्बे से ले कर रोड पर धरना प्रदर्शन तक कर के अवैध राष्ट्र का विरोध किया है। यह सऊदी के अवैध राष्ट्र इस्राईल के साथ गोपनीय संबंध ही हैं जिसके चलते यह सारे सवाल आज पूरे विश्व के मुसलमानों के दिमाग़ में उठ रहे हैं। दूसरी एक और अहम बात वह यह कि बहरैन की एक टीम ने जिस समय पूरे विश्व में ट्र्म्प के इस फ़ैसले का विरोध हो रहा था उसी समय क्यों क़ुद्स का दौरा किया, जबकि पूरी दुनिया जानती है कि बहरैन के आले ख़लीफ़ा सऊदी के इशारों के बिना छोटे से छोटा काम भी नहीं करते? आले सऊद का फ़िलिस्तीन को किसी भी तरह का कोई समर्थन न होने पर एक और गवाह रायटर्स की वह रिपोर्ट है जिसमें कहा गया है कि पूरे विश्व में ट्र्म्प के क़ुद्स को इस्राईल की राजधानी घोषित करने वाले फ़ैसले पर आक्रोश के बावजूद अमेरिका ने यह फ़ैसला आले सऊद के साथ बातचीत के बाद ही लिया है। रायटर्स की रिपोर्ट ने आले सऊद की अमेरिका के इस फ़ैसले पर औपचारिक प्रतिक्रिया के बारे में कहा कि सऊदी के उच्चाधिकारी ने विशेष वार्ता में ज़िक्र किया कि ऐसा लगता है कि आले सऊद, फ़िलिस्तीन और इस्राईल के बीच बातचीत कराने की किसी बड़ी साज़िश का हिस्सा है।
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फार्स न्यूज़


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