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Code : 191000
Date of publication : 19/12/2017 18:57
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क़ब्र में होने वाले सवाल जवाब

क़ब्र में सवाल जवाब का होना सभी शियों का अक़ीदा है, लेकिन कैसे और किस समय सवाल जवाब होंगे इस बारे में उलमा ने अलग अलग बातें बयान की हैं, पैग़म्बर स.अ. से हदीस नक़्ल हुई है जिसमें आपने फ़रमाया कि अल्लाह के दो फ़रिश्ते हैं जिनका नाम मुन्किर और नकीर है यही दोनों मरने वाले से सवाल जवाब करेंगे।


विलायत पोर्टल :
  इस्लामी अक़ीदों में इंसान के मरने के बाद और बरज़ख़ की दुनिया से संबंधित एक अक़ीदा क़ब्र में होने वाले सवाल जवाब का है, इमाम ज़माना अ.स. के बारे में पाई जाने वाली ज़ियारते आले यासीन जिसके पढ़ने पर काफ़ी ज़ोर भी दिया गया है उसमें भी यह बात मौजूद है कि क़ब्र में फ़रिश्तों द्वारा सवाल जवाब का होना एक हक़ीक़त है।
इमाम सादिक़ अ.स. से हदीस भी नक़्ल हुई है जिसमें आपने फ़रमाया कि जो भी इन तीन चीज़ों को मानने से इंकार कर दे वह हम शियों में से नहीं है,
1. पैग़म्बर स.अ. के मेराज पर जाने को,
2. क़ब्र में सवाल जवाब का होना,
3. अहलेबैत अ.स. द्वारा शफ़ाअत का होना।
 क़ब्र में सवाल जवाब का होना सभी शियों का अक़ीदा है, लेकिन कैसे और किस समय सवाल जवाब होंगे इस बारे में उलमा ने अलग अलग बातें बयान की हैं, पैग़म्बर स.अ. से हदीस नक़्ल हुई है जिसमें आपने फ़रमाया कि अल्लाह के दो फ़रिश्ते हैं जिनका नाम मुन्किर और नकीर है यही दोनों मरने वाले से सवाल जवाब करेंगे। और इनके नाम के बारे में मिलता है कि चूंकि इन्हें कोई पहचानता नहीं है इसलिए इन्हें यह नाम दिया गया है, कुछ रिवायत में यह भी है कि यह दोनों फ़रिश्ते हर क़ब्र में अलग अलग तरह की शक्ल के साथ जाएंगे, गुनहगारों की क़ब्र में ग़ुस्से की शक्ल में हाज़िर होंगे, और जो नेक अमल अंजाम देने वाले हैं उनकी क़ब्र में मुबश्शिर और बशीर बन कर ख़ुशी के साथ हाज़िर होंगे।
काफ़ी की तीसरी जिल्द में है कि अबू बसीर ने इमाम सादिक़ अ.स. से सवाल किया कि क्या यह फ़रिश्ते मोमिन और काफ़िर दोनों की क़ब्र में एक ही तरह से जाएंगे? इमाम अ.स. ने फ़रमाया बिल्कुल नहीं। रजब के महीने की दुआओं में से एक दुआ में मौजूद है कि ख़ुदाया हमें बरज़ख़ के सवाल जवाब से नजात दे, मुन्किर और नकीर से दूर रख और मुबश्शिर और बशीर को हमारी क़ब्र में भेज देना, क्योंकि यह हंसते हुए चेहरे के साथ क़ब्र में आते हैं। क़ब्र में दफ़्न होते ही बरज़ख़ की दुनिया शुरू हो जाती है और जैसे ही इंसान क़ब्र में दफ़्न किया जाता है उसी समय यह दोनों फ़रिश्ते क़ब्र में आते हैं, मरने के बाद इंसान कई घंटों बल्कि शुरुआती कई दिनों तक नहीं समझ पाता कि वह अब किसी और दुनिया में आ चुका है, वह क़ब्र में पहुंचने के बाद भी शुरू में यही सोंचता है कि वह अभी उसी दुनिया में है जिसमें ज़िंदगी बिता रहा है। पैग़म्बर स.अ. फ़रमाते हैं कि जिस समय इंसान को जिस्म को क़ब्र में रखा जाएगा और अभी इस मरने वाले के कानों में दफ़्न करने वालों के वापस जाने की आहट सुनाई दे रही होगी उसी समय यह दोनों फ़रिश्ते क़ब्र में आ जाएंगे। एक हदीस नहजुल बलाग़ा में भी है कि जैसे ही जनाज़े में शामिल होने वाले वापस होगें और उसके बिछड़ जाने पर रोने वाले रिश्तेदार वहां से वापस होंगे उसी समय उसको क़ब्र में उठा कर बिठा दिया जाएगा और उस से सवाल जवाब किया जाएगा, यह सवाल जवाब अचानक शुरू हो जाएंगे और मरने वाले के दिल में इन सवालों का इनता ख़ौफ़ होगा कि वह बहुत धीरे धीरे सोंच सोंच कर जवाब देगा। हदीसों में है कि जब कोई मर जाए तो उसके लिए 2 बार तलक़ीन पढ़ो पहली बार जब उसे क़ब्र में उतारा जाए दूसरी बार तब जब क़ब्र में लिटा कर क़ब्र को बंद कर दिया जाए। इमाम सादिक़ अ.स. से नक़्ल होने वाली हदीस में यह भी है जिस समय दूसरी बार तलक़ीन पढ़ी जाती है मुन्किर और नकीर कहते हैं जिस हुज्जत के लिए हम सवाल जवाब करने के लिए आए थे वह इसको तलक़ीन द्वारा बता दी गई है अब सवाल की ज़रूरत नहीं है हम लोग वापस चलते हैं।
अब से 26 साल पहले शियों के महान मरजा आयतुल्लाहिल उज़्मा अब्दुल करीम हाएरी की ज़िंदगी के हालात में मिलता है कि उनके एक दोस्त की वफ़ात हो जाती है और तलक़ीन के लिए आप ख़ुद क़ब्र में उतरे और आमतौर से जितना समय लगता है उस से अधिक आप क़ब्र में रहे, जब आप बाहर निकले तो आपसे देरी का कारण पूछा गया आपने फ़रमाया मैं फ़रिश्तों का इंतेज़ार कर रहा था कि वह आ जाएं और सवाल पूछें ताकि मैं संतुष्ट हो सकूं कि इसने सही जवाब दिया है। इस बात से मालूम होता है कि सवाल जवाब ही बरज़ख़ में पहुंचने का संकेत है, इसी लिए जब सब क़ब्रिस्तान छोड़ कर जाने लगें तो कुछ लोगों को रुक कर मरने वाले की मग़फ़ेरत और की दुआ और तलक़ीन के जुमलों को दोहराना चाहिए क्योंकि मरने वाले को उस समय सबसे अधिक इसी चीज़ की ज़रूरत होती है।
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