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Code : 190501
Date of publication : 18/11/2017 15:35
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जन्नतुल बक़ी के पुनर्निर्माण और ज़ियारत के लिए सऊदी अरब के तत्कालीन बादशाह का अनुमति पत्र ।

रौज़े ढहाए जाने के एक साल बाद ही सऊदी शासक से भेंट कर उस से रौज़ों के पुनर्निर्माण और बिना किसी अवरोध के यहाँ की ज़ियारत का अनुमति पत्र लिया था लेकिन खेद की बात यह है कि आले सऊद ने ना ही अपने वादों को पूरा किया और ना ही बाद में किसी ने इस मुद्दे पर कोई एक्शन लिया ।

विलायत पोर्टल : फार्स न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ईरान के प्रख्यात डॉक्यूमेंट्री निर्माता और रिसर्च स्कॉलर अहमद इब्राहीमी ने जन्नतुल बक़ी के बारे में अनेक दस्तावेज़ जारी करते हुए तत्कालीन सऊदी शासक अब्दुल अज़ीज़ के उस अनुमति पत्र को भी जारी किया है जिस में तत्कालीन सऊदी शासक ने जन्नतुल बक़ी के पुनर्निर्माण और बिना किसी अवरोध के यहाँ की ज़ियारत की अनुमति दी है । इब्राहीमी ने कहा कि हम 10 साल से अधिक समय तक ईरान , इराक , तुर्की समेत कई देशों में 3 हज़ार से अधिक दस्तावेज़ पर काम करने के बाद इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि प्रख्यात शिया धर्म गुरु अल्लामा हायरी ने इस मुद्दे पर तत्कालीन सऊदी शासक से मुलाक़ात की थी ।
इब्राहीमी के अनुसार अल्लामा हायरी रौज़ों की हिफाज़त करने वाले पहले वीर योद्धा हैं जिन्होंने बक़ी में रौज़े ढहाए जाने के एक साल बाद ही सऊदी शासक से भेंट कर उस से रौज़ों के पुनर्निर्माण और बिना किसी अवरोध के यहाँ की ज़ियारत का अनुमति पत्र लिया था लेकिन खेद की बात यह है कि आले सऊद ने नाहि अपने वादों को पूरा किया और ना ही बाद में किसी ने इस मुद्दे पर कोई एक्शन लिया । इब्राहीमी के अनुसार आधिकारिक तौर पर सऊदी शासक की ओर से शिया समाज को दिया गया यह दस्तावेज़ सऊदी अरब मे शिया मत को आधिकारिक तौर पर मान्यता देता है लेकिन अफ़सोस कि इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर समाज की तरफ से कोई प्रभावशाली क़दम नहीं उठाया गया जिसका नतीजा है कि आज भी हमें जन्नतुल बक़ी में ज़ियारत के समय अत्यधिक कठिनाई का समाना करना पड़ता है ।
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. फ़ार्स न्यूज़


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