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Date of publication : 15/11/2017 16:25
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यमन जनांदोलन के पीछे आईआरजीसी बल होता तो आले सऊद का नामो निशान मिट जाता : ब्रिटिश विश्लेषक

यह सिर्फ सऊदी अरब के भय और डर को दर्शाता है , इस में कोई वास्तविकता नहीं है ।


विलायत पोर्टल :  प्राप्त जानकारी के अनुसार ब्रिटिश विश्लेषक तथा यमन मामलों की जानकर कैथरीन का कहना है कि सऊदी अरब के दावों के अनुरूप अगर यमन जनांदोलन अंसारुल्लाह के पीछे ईरान की सिपाहे पासदारने इंक़ेलाब {आईआरजीसी } का सैन्य सहयोग होता तो आज आले सऊद का नामो निशान मिट चुका होता । उन्होंने कहा कि यमन के भू-राजनीतिक महत्त्व को देखते हुए यह देश काफी महत्वपूर्ण हो गया है सब जानते हैं कि जो देश वर्तमान मे यमन को अपने नियंत्रण में ले सकता है वह पूरे अफ्रीका , एशिया , और मिडिल ईस्ट को नियंत्रित कर सकता है । आले सऊद यमन को अपने अधीन लेकर यहाँ पाइप लाइन बिछा कर ईरान के हुर्मुज़ जलडमरू मध्य के महत्त्व को कम करना चाहते हैं । कैथरीन ने कहा कि आले सऊद का यह कहना कि रियाज़ एयरपोर्ट पर दाग़े गई मिसाइल ईरान ने अंसारुल्लाह को दिए थे यह सिर्फ सऊदी अरब के भय और डर को दर्शाता है , इस में कोई वास्तविकता नहीं है । ईरान और आईआरजीसी बल की वहां कोई सैन्य उपस्थिति नहीं है उन्होने सैन्य क्षेत्र में कोई काम नहीं किया है । अगर ईरान और आईआरजीसी बल यमन सेना और अंसारुल्लाह आंदोलन की समर्थन करते तो अब तक यमन युद्ध समाप्त हो चुका होता और आले सऊद का खेल ख़त्म हो चुका होता ।
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 तसनीम


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