Delicious facebook RSS दोस्तों को भेजें। प्रिंट सेव करें। XML TEXT PDF
Code : 190356
Date of publication : 5/11/2017 15:33
Hit : 784

कर्बला और इमाम हुसैन अ.स. ग़ैर मुस्लिमों की निगाह में

माम हुसैन अ.स. इस्लामी इतिहास की उस महान हस्ती का नाम है जिसके दर पर हर धर्म व मज़हब और हर राष्ट्र व देश के लोगों ने गर्व के साथ अपने सर को झुकाया है


विलायत पोर्टलः इमाम हुसैन अ.स. इस्लामी इतिहास की उस महान हस्ती का नाम है जिसके दर पर हर धर्म व मज़हब और हर राष्ट्र व देश के लोगों ने गर्व के साथ अपने सर को झुकाया है और बहुत सारे ईसाई, यहूदी, हिंदू और दूसरे अन्य धर्मों के बुद्धिजीवियों ने कर्बला की घटना का अध्ययन करके इमाम हुसैन अ.स. की क़ुर्बानी को सराहते हुए यज़ीद के ज़ुल्म, अत्याचार, क्ररूरता, बर्बरता और बे रहमी के विरूद्ध क़लम उठाया है।

हम इल लेख में ऐसे ही कुछ विद्वानों और इतिहास के जानकारों की इमाम हुसैन अ.स. और कर्बला के बारे में लिखी गई कुछ क़ीमती बातों को आपके सामने पेश कर रहे हैं।

गेब्रियल एंगरी: कर्बला ही है जिसने इमाम अली अ.स. और इमाम हुसैन अ.स. के तरफ़दारों के अंदर बहादुरी का ऐसा जोश पैदा किया कि कर्बला के बाद यह लोग अत्याचार के विरुद्ध बिना किसी भय व डर के आवाज़ उठाते हुए मैदान में दिखाई देते हैं। (अली अ.स. व हुसैन अ.स. दो क़हेरमाने इस्लाम, गेब्रियल एंगरी, तर्जुमा- फ़रोग़ शहाब, पेज 282)

इरविंग: अमरीका के वाशिंग्टन शहर के मशहूर इतिहासकार का कहना है कि, करबला के तपते रेगिस्तान और इराक़ की बंजर ज़मीन पर आपका बलिदान अमर है, ऐ सावंत, ऐ बहादुरी की मिसाल, ऐ मेरे शूरवीर, ऐ हुसैन अ.स.। (दर्सी कि हुसैन अ.स. बे इंसानहा आमूख़्त, सैय्यद अब्दुल करीम हाशमी निजाद, पेज 451)

कार्ल ब्रोकेलमैन: जर्मन के मशहूर ओरियनटालिस्ट का कहना है कि इमाम हुसैन अ.स. की शहादत के राजनीतिक परिणाम और प्रभाव के अलावा आपकी शहादत से शिया मज़हब को काफ़ी मज़बूती मिली और यह मज़हब सऊदी और उसके सहयोगी हुकूमतों के विरोध का केंद्र बन गया। (तारीख़े मेलल व दोवले इस्लामी, कार्ल ब्रोकेलमैन, तर्जुमा-हादी जज़ाएरी, पेज 108)

एडवर्ड ब्रून: इंग्लैंड के विद्वान एडवर्ड ब्रून का कहना है कि, हमारे विचारों के अनुसार शिया और इमाम अली अ.स. की पैरवी करने वाले इतने अधिक भावनात्मक नहीं थे, लेकिन कर्बला के इंक़ेलाब के बाद हालात बदल गए, पैग़म्बर स.अ. के नवासे इमाम हुसैन अ.स. का नाहक़ ख़ून बहने और उनकी प्यास और कर्बला की तपती ज़मीन पर उनकी लाशों के पड़े होने ने इस क़ौम की भावनाओं को घायल कर दिया और इसमें इतना जोश पैदा कर दिया कि अब यह न केवल हर ख़तरे से निपटने को तैय्यार रहते हैं बल्कि मौत से भी टकराने को तैय्यार रहते हैं। (अज़मते हुसैन इब्ने अली अ.स., अबू अब्दिल्लाह ज़न्जानी, पेज 44)

तामदास टंडन: इमाम हुसैन अ.स. की शहादत ने मेरे बचपने ही में मुझे काफ़ी प्रभावित किया था, मैं इस ऐतिहासिक महान याद की अहमियत को अच्छी तरह समझता हूं, इस महान क़ुर्बानी ने इंसानियत को बुलंदी पर ले जा कर खड़ा किया है, ज़रूरी है कि उनकी याद हमेशा बाक़ी रहे और लोगों को उसकी हमेशा याद दिलाई जाती रहे। (दर्सी कि हुसैन अ.स. बे इंसानहा आमूख़्त, सैय्यद अब्दुल करीम हाशमी निजाद, पेज 448)

जेम्स फ्रेडरिक: इमाम हुसैन अ.स. और दूसरे शहीदों की शहादत का अहम पैग़ाम यह है कि दुनिया में न्याय और अदालत के सिध्दांत और आपसी मेल मिलाप को बाक़ी रखा जाए, और अगर इन सिध्दांतों और मेल मिलाप के उसूलों से कोई टकराया और इसे बदलने की कोशिश की और उसका मुक़ाबला किया गया तो वह सिध्दांत और उसूल हमेशा के लिए बाक़ी रहेंगे। (दर्सी कि हुसैन अ.स. बे इंसानहा आमूख़्त, सैय्यद अब्दुल करीम हाशमी निजाद, पेज 449)

रेनो जोसेफ़: फ़्रांस के इस मशहूर विद्वान जिसने इस्लाम और मुसलमान नाम की किताब भी लिखी है कहता है कि, शियों ने अपने मज़हब को कट्टरता के बल पर नहीं फैलाया, बल्कि दो तिहाई लोग तबलीग़ और मजलिसों द्वारा शिया हुए हैं, और इनके द्वारा की जाने वाली इमाम हुसैन अ.स. की मजलिसों में हिंदू मजूसी और भी दूसरे मज़हब के लोग शामिल होते हैं। (परतूई अज़ अज़मते हुसैन अ.स., लुत्फ़ुल्लाह साफ़ी, पेज 440)

चार्ल्स डेकेंस: जो लोग इमाम हुसैन अ.स. द्वारा लाए गए इंक़ेलाब को केवल एक जंग का रूप दे कर उसकी अहमियत को कम करना चाहते हैं उन लोगों को जवाब देते हुए कहता हूं कि, अगर इमाम हुसैन अ.स. का इरादा जंग और लड़ाई था तो मेरी समझ में यह बात नहीं आती कि आप अपने घर की औरतों और बच्चों को क्यों ले गए थे, इसलिए अक़्ल कहती है कि इमाम हुसैन अ.स. ने दीन और इस्माम के लिए यह क़ुर्बानी पेश की। (दर्सी कि हुसैन अ.स. बे इंसानहा आमूख़्त, सैय्यद अब्दुल करीम हाशमी निजाद, पेज 448)

मोरिस डॉक्बेरी: फ़्रांस के इस लेखक का कहना है कि, इमाम हुसैन अ.स. का अनुसरण करने वाले इस बात को इमाम हुसैन अ.स. की अज़ादारी के कारण यह बात अच्छी तरह से जानते हैं कि साम्राज्यवादी ताक़तों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता, क्योंकि उनके इमाम अ.स. का कर्बला में नारा ही यही था कि जान दे देंगे लेकिन अत्याचार के आगे सर नहीं झुकाएंगे। (दर्सी कि हुसैन अ.स. बे इंसानहा आमूख़्त, सैय्यद अब्दुल करीम हाशमी निजाद, पेज 451)

जार्ज ज़ैदान: लेबनान के ईसाई लेखक का कहना है कि, पैग़म्बर स.अ. के देहांत के बाद दुनिया और सत्ता की लालच इस्लामी नैतिकता पर हावी हो गई, और इमाम अली अ.स. और उनकी घराने के विचारों से मुंह फेर लिया गया, और फिर कूफ़े के लोगों ने दुनिया, दौलत और हुकूमत की लालच में इमाम हुसैन अ.स. की बैअत को तोड़ दिया और फिर उन्हें क़त्ल कर डाला। (तारीख़े तमद्दुने इस्लाम, जार्ज ज़ैदान, तर्जुमा-अली जवाहर कलाम, पेज 65)

थॉमस मैन: जर्मन के विद्वान थॉमस मैन का कहना है कि अगर इमाम हुसैन अ.स. और हज़रत मसीह की क़ुर्बानी के बीच तुलना की जाए तो इमाम हुसैन अ.स. की क़ुर्बानी ज़्यादा अहम और ज़्यादा प्रभावित करने वाली दिखाई देती है, क्योंकि हज़रत मसीह ने जब क़ुर्बानी दी तो उनको बीवी और बच्चों की कोई चिंता नहीं थी, क्योंकि उनकी शादी ही नहीं हुई थी, लेकिन इमाम हुसैन अ.स. बीवी बच्चों के साथ थे, और कुछ बच्चे तो अभी गोद ही में थे, उनको बाप की ज़रूरत थी। (तहरीफ़ शनासी दर आशूरा दर परतोए इमाम शनासी, दाऊद इल्हामी, पेज 130)

कर्ट फ़्रेशलर: जर्मन का यह लेखक कहता है कि, इमाम हुसैन अ.स. ने क़ुर्बानी का नया इतिहास लिखा, और वह इस तरह की आपने अपनी क़ुर्बानी से पहले अपने बच्चों को क़ुर्बान किया........ इमाम अ.स. का अपने लिए शहादत को चुनना न किसी हठधर्मी के कारण था और न ही किसी व्यक्तिगत उद्देश्य से बल्कि आप पूरी तरह से अक़्ल के हुक्म के अनुसार चल रहे थे, आपने अटल फैसला कर लिया था कि क़ुर्बानी दे दूंगा लेकिन दीन और अपने विचारों का यज़ीद की गंदी राजनीति के साथ सौदा करके अपमानित ज़िंदगी नहीं जिऊंगा।

हम जानते हैं कि हुसैन अ.स. शहीद होने के लिए तैय्यार थे, और अपने आपको दीन पर क़ुर्बान करने के लिए पूरी तरह से तैय्यार कर चुके थे, फिर आप घोड़े पर सवार हो कर और तलवार ले कर मैदान में क्यों गए? इसका सीधा सा जवाब यह है कि हाथ पर हाथ धरे बैठे रहना मर्दानगी नहीं है और हक़ को साबित करने के लिए तलवार उठाना ही दीन है, इमाम हुसैन अ.स. की नज़र में अपनी गर्दन ख़ुद ही से कटने के लिए पेश कर देना आत्महत्या थी जो एक बहादुर और ईमान वाला इंसान कभी नहीं कर सकता। (इमाम हुसैन अ.स. और ईरान, कर्ट फ्ऱेशलर, तर्जुमा-ज़बीहुल्लाह मंसूरी, दूसरा एडीशन, पेज 444)

थामस कार्लाइल: इंग्लैंड के मशहूर लेखक का कहना है कि कर्बला का बेहतरीन पैग़ाम यह है कि इमाम हुसैन अ.स. और उनके वफ़ादार साथियों का अल्लाह पर मज़बूत ईमान था, उन्होंने अपने अमल से साबित कर दिया कि जहां हक़ और बातिल का टकराव हो वहां संख्या कम होने की कोई हैसियत नहीं होती, इमाम हुसैन अ.स. की इतने कम साथियों के साथ कामयाबी मेरे लिए बहुत आश्चर्य की बात है। (दर्सी कि हुसैन अ.स. बे इंसानहा आमूख़्त, सैय्यद अब्दुल करीम हाशमी निजाद, पेज 448)

महात्मा गांधी: हिन्दुस्तान में इंक़ेलाब लाने वाले महात्मा गांधी का कहना है कि मैंने इस्लाम के महान शहीद इमाम हुसैन अ.स. की जीवनी और कर्बला के पन्नों को ध्यान से पढ़ा है, अगर हिन्दुस्तान को एक आज़ाद देश बनना है तो उसको इमाम हुसैन अ.स. और कर्बला वालों को आइडियल बनाना होगा। (दर्सी कि हुसैन अ.स. बे इंसानहा आमूख़्त, सैय्यद अब्दुल करीम हाशमी निजाद, पेज 447)

19वीं सदी में फ़्रांस की ENCYCLOPEDIA लिखने वाली एक मैडम लिखती हैं कि, इमाम हुसैन अ.स. की मज़लूमियत की सबसे बड़ी दलील यह है कि आपको दूध पीता बच्चा तक क़ुर्बान करना पड़ा, जबकि इतिहास में पहले कभी ऐसी क़ुर्बानी का ज़िक्र नहीं मिलता, इमाम हुसैन अ.स. बच्चे को ले कर पानी का सवाल कर रहे थे लेकिन वह यज़ीदी फ़ौज इस हद तक बे रहम थी कि पानी तो दूर उस बच्चे को तीर का निशाना बनाया गया, दुश्मनों की इस क्रूरता और बर्बरता ने इमाम की मज़लूमियत को साबित कर दिया, और इमाम अ.स. की यही मज़लूमियत आपकी ऐसी ताक़त बनी कि बनी उमय्या के ज़ाहिरी सम्मान और उनकी पूरी हुकूमत को उलट कर रख दिया, उनकी और उनके घराने की बहादुरी ने पैग़म्बर द्वारा लाए हुए दीन को एक नया जीवन दिया। (चेहरए देरख़शाने हुसैन इब्ने अली अ.स., अली रब्बानी ख़लख़ाली, पेज 134)


आपका कमेंट



मेरा कमेंट शो न किया जाये
Security Code :

नवीनतम लेख

दीन के बाक़ी रहने का राज़ अहलेबैत अ.स. की मोहब्बत में है अमेरिका ने लगाई गुहार, ईरान का मुक़ाबला करने के लिए एकजुट हों अरब देश ईरान को छोड़ो सऊदी अरब की लगाम कसना बहुत ज़रूरी : रैंड पॉल इराक की धरती को ईरान के हितों को चोट पहुँचाने के लिए भी प्रयोग नहीं होने देंगे : बरहम सालेह दमिश्क़, आम लोगों पर मौत बनकर बरसे अमेरिकी विमान, 40 से अधिक की मौत। इस्राईल का भविष्य दांव पर, अकेले कई अरब देशों को हराना वाला अवैध राष्ट्र आज हमास से नहीं जीत सकता : ज़ायोनी सैन्याधिकारी ट्रम्प की एक और हार, अदालत ने दिया सीएनएन पत्रकार का पास जारी करने का आदेश ट्रम्प, बिन सलमान, और नेतन्याहू के शैतानी त्रिकोण को संकट का सामना : हिज़्बुल्लाह आईएसआईएस इस्लाम का प्रतीक नहीं, हरमैन शरीफ़ैन के साथ विश्वासघात कर रहे हैं आले सऊद सऊदी के बाद आर्थिक मदद मांगने संयुक्त अरब अमीरात जाएंगे इमरान खान ख़ाशुक़जी का सर काट कर रियाज़ ले गए थे सऊदी हत्यारे । बस एक साल, और हिज़्बुल्लाह की तरह शक्तिशाली होगा हमास : लिबरमैन इस्राईल को दमिश्क़ का कड़ा संदेश, जौलान सीरिया का है और हम जानते हैं उसे कैसे लेना है । इमाम हसन असकरी अ.स. की ज़िंदगी पर एक निगाह अमेरिका का युग बीत गया, पश्चिम एशिया से विदाई की तैयारी कर ले : मेजर जनरल मूसवी