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Code : 189547
Date of publication : 12/9/2017 14:47
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म्यांमार सरकार के अत्याचारों मे नोबेल विजेता निर्दयी महिला आंग सान सू की बराबर की भागीदार: आयतुल्लाह ख़ामेनई

म्यांमार में जारी क़त्ले आम को धार्मिक मानने से इंकार करते हुए कहा कि संभव है कि इसमें धार्मिक कट्टरता का प्रभाव हो लेकिन यह विशुद्ध रूप से एक राजनैतिक मुद्दा है जो म्यांमार सरकार के सरंक्षण में चल रहा है जिसका नेतृत्व नोबेल विजेता निर्दयी महिला आंग सान सू की कर रही है, जो अपने आप में नोबेल पुरस्कार के निष्प्रभावी तथा मृत्यु सन्न होने का सुबूत है ।


विलायत पोर्टल :  प्राप्त जानकारी के अनुसार ईरान के सुप्रीम लीडर हज़रत आयतुल्लाह ख़ामेनई ने म्यंमार में जारी रोहिंग्या समुदाय के क़त्ले आम की कड़ी निंदा करते हुए मानवाधिकार आयोग, संयुक्त राष्ट्र तथा अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं की चुप्पी पर निराशा प्रकट की । आयतुल्लाह ख़ामेनई ने कहा कि इस्लामी गणराज्य ईरान अपने गौरव को सहेजते हुए दुनिया भर में होने वाले अत्याचारों के विरुद्ध अपनी प्रखर आवाज़ बुलंद करता रहे। उन्होंने म्यांमार में जारी क़त्ले आम को धार्मिक मानने से इंकार करते हुए कहा कि संभव है कि इसमें धार्मिक कट्टरता का प्रभाव हो लेकिन यह विशुद्ध रूप से एक राजनैतिक मुद्दा है जो म्यांमार सरकार के सरंक्षण में चल रहा है जिसका नेतृत्व नोबेल विजेता निर्दयी महिला आंग सान सू की कर रही है, जो अपने आप में नोबेल पुरस्कार के निष्प्रभावी तथा मृत्यु सन्न होने का सुबूत है । आयतुल्लाह ख़ामेनई ने कहा कि मुस्लिम जगत, मुस्लिम देश, संयुक्त राष्ट्र तथा वैश्विक संस्थाओं के सामने म्यांमार बिना किसी रोक टोक के निहत्थे लोगों पर अत्याचार ढा रहा है। मानवाधिकार का ढिंढोरा पीटने वाले तथा एक अपराधी के लिए पूरे पूरे देश में उथल पुथल मचा देने वाले तथाकथित मानवाधिकार के रखवाले म्यांमार में हो रहे हज़ारों लोगों के क़त्ले आम का तमाशा देख रहे हैं तथा हाथ पर हाथ धरे बैठें हैं ? मुस्लिम जगत को आगे बढ़ कर कोई क़दम उठाना होगा मुस्लिम देशों को कोई कार्रवाई करना ही होगी ,कोई फौजी या सैन्य कार्रवाई ना कर के राजनैतिक रूप से म्यांमार पर दबाव बनाना होगा, उसका आर्थिक बायकाट करना होगा तथा उसे अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के सामने खड़ा करना होगा। आयतुल्लाह ख़ामेनई ने कहा कि ईरान को अपने गौरव को सहेजते हुए दुनिया भर में जहाँ भी अत्याचार हो उसके विरुद्ध आवाज़ बुलंद करते रहना होगा चाहे वह फिलिस्तीन में ज़ायोनी अत्याचार हों या यमन पर आले सऊद की बमबारी और अतिक्रमण, या फिर म्यांमार में हो रहा रोहिंग्या मुस्लिम समुदाय का क़त्ले आम ।
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अलआलम


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