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Code : 189515
Date of publication : 10/9/2017 18:10
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म्यांमार संकट ने संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर फिर सवाल उठाये ।

म्यांमार में जारी क़त्ले आम पर संयुक्त राष्ट्र की चुप्पी कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि ग़ज़्ज़ा, फिलिस्तीन, यमन में भी संयुक्त राष्ट्र मुसलमानों के क़त्ले आम पर मूक बधिर तमाशाई बना रहता है ।


विलायत पोर्टल :  प्राप्त जानकारी के अनुसार तेहरान में संयुक्त राष्ट्र के दफ्तर के सामने अनेक छात्र संघों ने मिलकर म्यांमार में जारी रोहिंग्या समुदाय के क़त्ले आम पर विरोध प्रदर्शन किया । दि इस्लामिक एसोसिएशन ऑफ़ स्टूडेंट्स के अध्यक्ष ने कहा कि म्यांमार में रोहिंग्या समुदाय के क़त्ले आम पर संयुक्त राष्ट्र की प्रतिक्रिया यह बताने के लिए पर्याप्त है कि संयुक्त राष्ट्र स्वंय मानवाधिकारों की अनदेखी करता है तथा वह भेदभाव पूर्ण नीति अपनाता है । उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार घोषणा पत्र का हवाला देते हुए कहा कि इस में कहा गया है कि सभी लोगों को समानाधिकार हासिल हैं, लेकिन खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि जब बात मुसलमानों की होती है तो यह समानाधिकार उनके लिए समाप्त हो जाता है। उन्होंने कहा कि म्यांमार में जारी क़त्ले आम पर संयुक्त राष्ट्र की चुप्पी कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि ग़ज़्ज़ा, फिलिस्तीन, यमन में भी संयुक्त राष्ट्र मुसलमानों के क़त्ले आम पर मूक बधिर तमाशाई बना रहता है ।
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अलआलम


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