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Code : 189491
Date of publication : 8/9/2017 11:19
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ग़दीर की अहमियत

ग़दीर ऐसी घटना है जिसने इस्लामी जगत में ऐसा इंक़ेलाब पैदा कर दिया था जिसकी चमक पूरी दुनिया तक पहुंची थी। ग़दीर से पहले बहुत से लोग सोचते थे कि पैग़म्बर स.अ. की वफ़ात के बाद इस्लाम और उसके संस्कार और उसकी तालीमात के फैलने का सिलसिला रुक जाएगा, और पिछले दीनों की तरह इस्लाम भी ख़त्म हो जाएगा, और धीरे धीरे दूसरे दीनों की तरह इसका भी कोई नाम लेने वाला भी नहीं रहेगा, लेकिन ग़दीर ने इस्माम के इतिहास में इस्लाम की एक नई पहचान लिख दी, लेकिन यह बात भी सही है कि अगर ग़दीर न होती तो सच में इस्लाम दूसरे दीनों की तरह अपने आख़िरी कमाल तक नहीं पहुंचता, और न ही हमेशा बाक़ी रहने वाला दीन कहलाता, क्योंकि.........

विलायत पोर्टल : इस्लामी इतिहास के कई महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक ग़दीर भी है, यह अहम घटना पैग़म्बर स.अ. की ज़िंदगी के आख़िरी दिनों में पेश आई, यह ऐसी घटना थी जिस से बहुत सारे बदलाव, अक़ीदे, विचार सामने आए, पिछले 1400 सालों में बड़े बड़े विद्वानों और उलमा ने इस घटना के बारे में अनेक किताबें लिखी हैं। ग़दीर को लेकर अनेक सवाल उठाए जाते हैं, जैसे क्या ग़दीर की घटना शियों द्वारा गढ़ी गई है? क्या ग़दीर के बारे में दूसरे फ़िर्क़ों की किताबों में भी कुछ ज़िक्र है? और भी इस तरह के कई सवाल हैं जो ग़दीर के बारे में सामने आते रहते हैं। पैग़म्बर स.अ. की बेसत के बाद दुनिया में बहुत सारे बदलाव आए, ऐसे बदलाव कि जिस ने अनेक तरह से लोगों को प्रभावित किया, और बहुत कम समय में बेसत का प्रभाव मक्का और मदीना से निकल कर दूसरे आस पास के शहरों और देशों में दिखाई देने लगा, और यहां तक कि पूरी दुनिया में एक सांस्कृति और सभ्यता के रूप में बेसत का असर ज़ाहिर होने लगा, और इसमें कोई शक नहीं है कि जिस तरह इस्लाम से पहले वाले दीन अपने समय में बदलाव पैदा करते थे उसी तरह इस्लाम के आने के बाद से जो बदलाव देखने को मिला वह सबसे अलग था, यही कारण है कि इस्लाम बहुत कम समय में पूरी दुनिया में फैल गया, और पूरे पूरे इलाक़े मुसलमान होने लगे, यहां तक कि ईरान और रूम की बादशाहत का रंग भी इस्लाम के आगे फीका पड़ गया। पैग़म्बर स.अ. की ज़िंदगी का एक एक क्षण एक यादगार बदलाव पैदा कर रहा था, क़ुर्आन की सब से पहली नाज़िल होने वाली सूरए अलक़ की आयतों से यह बदलाव शुरू हुआ, उसके बाद इस बदलाव के सिलसिले को बयान करना ना मुमकिन है, आपकी ज़िंगदी में पेश आने वाला हर हादसा अपने आप में यादगार बनता गया, जिसके लिए ज़रूरी है उलमा और विद्वान इस विषय पर तहक़ीक़ (Research) करें। पैग़म्बर स.अ. की ज़िंदगी के आख़िरी दिनों में पेश आने वाली सबसे यादगार और अहम घटना ग़दीर है, जिसके कारण कई और भी घटनाएं पेश आईं जिसके बाद कहा जा सकता है कि ग़दीर ऐसी घटना है जिसने इस्लामी जगत में ऐसा इंक़ेलाब पैदा कर दिया था जिसकी चमक पूरी दुनिया तक पहुंची थी। ग़दीर से पहले बहुत से लोग सोचते थे कि पैग़म्बर स.अ. की वफ़ात के बाद इस्लाम और उसके संस्कार और उसकी तालीमात के फैलने का सिलसिला रुक जाएगा, और पिछले दीनों की तरह इस्लाम भी ख़त्म हो जाएगा, और धीरे धीरे दूसरे दीनों की तरह इसका भी कोई नाम लेने वाला भी नहीं रहेगा, लेकिन ग़दीर ने इस्माम के इतिहास में इस्लाम की एक नई पहचान लिख दी, लेकिन यह बात भी सही है कि अगर ग़दीर न होती तो सच में इस्लाम दूसरे दीनों की तरह अपने आख़िरी कमाल तक नहीं पहुंचता, और न ही हमेशा बाक़ी रहने वाला दीन कहलाता, क्योंकि इस्लाम का बुरा चाहने वाले इस्लाम के दुश्मन पैग़म्बर स.अ. के इस दुनिया से जाने का बे सब्री से इन्तेज़ार कर रहे थे, और वह यही सोच रहे थे कि जैसे ही पैग़म्बर स.अ. की आंख बंद होगी इस्लाम का नाम भी उनके साथ दफ़्न हो जाएगा, और फिर धीरे धीरे इस्लाम का नाम और उसके अहकाम भी मिट जाएंगे। ग़दीर में पैग़म्बर स.अ. के जिसका मैं मौला हूं उसके यह अली अ.स. मौला हैं ऐलान करने से इस्लाम को एक नई पावर और एक नया विषय मिल गया, और इस्लाम एक नई वादी में पहुंच गया, एक ऐसी वादी जिसका पिछले किसी दीन में कोई इन्तेज़ाम नहीं था। बेशक ग़दीर ही है जिसने पैग़म्बर स.अ. की बेसत के मक़सद को पूरा किया, और उनकी बेसत की तरह यह भी बहुत अहम और क़ीमती है। ग़दीर पर कई एतेबार से बहस की ज़रूरत है, क्योंकि यह बाद में होने वाली बहुत सी घटना की शुरूआत है, कुछ जवानों की सोच यह है कि ग़दीर को केवल शिया आलिमों की ओर से बनाया गया है, और उसका ज़िक्र किसी भी अहले सुन्नत की किताब में नहीं है, यहां तक कि कुछ लोगों ग़दीर को एक अफ़साना मानते हुए कहते हैं कि यह केवल शियों का गढ़ा हुआ है, इतने बड़े आरोप को ग़लत ठहराने के लिए बहुत सारे शिया उलमा ने काफ़ी मेहनत की है जिसमें अल्लामा अमीनी भी हैं जिनकी किताब का नाम ही अल-ग़दीर है। .......................


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