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Date of publication : 8/7/2017 19:2
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इब्ने तैमिया, और मुसलमानों के ख़लीफ़ा का अपमान।

मैं इनके जवाब में कहूँगा, माविया, यज़ीद और बनी उमय्या और बनी अब्बास के हाकिमों का इस्लाम भी तवातुर के साथ नक़्ल हुआ है।

विलायत पोर्टल :
  इब्ने तैमिया ने अपनी किताब मिनहाजुस-सुन्नत कि जो हक़ीक़त में मिनहाजुल-बिदअत है इसमें आम मुसलमानों के चौथे और शियों के पहले ख़लीफ़ा इमाम अली अ.स. के बारे में सहीह हदीसों का इंकार करते हुए सभी को झूठी कहा है, वह हदीसें जिनके बारे में न जाने कितने हाफ़िज़ों और हाकिमों ने उनको अपनी अपनी किताबों में सही बताते हुए जगह दी है। (फ़रहंगे अक़ाएद व मज़ाहिबे इस्लामी, आयजुल्लाह जाफ़र सुबहानी, जिल्द 3, पेज 19)
इब्ने तैमिया मुसलमानों के ख़लीफ़ा इमाम अली अ.स. का अपमान करते हुए उनके इस्लाम में शक ज़ाहिर किया है, उसका कहना है कि, पैग़म्बर कि रिसालत के ऐलान से पहले क़ुरैश में बच्चों, बड़ों और औरतों में से कोई भी न ही मुसलमान था न मोमिन, न ही तीन लोग थे और न ही अली (अ.स.), उसका कहना है कि जब यह कहा जाता है कि सभी लोग उस समय बुतों की पूजा करते थे, तो इसमें बच्चे बूढ़े और औरते सब शामिल हैं फिर चाहे अली (अ.स.) ही क्यों न हों। उसका कहना है कि, अगर तुम कहो कि ना बालिग़ का कुफ़्र बालिग़ ही की तरह नहीं है, तो मैं कहूँगा कि ना बालिग़ का ईमान भी बालिग़ के ईमान की तरह नहीं है, जिस प्रकार दूसरों के लिए ईमान और कुफ़्र बालिग़ होने के बाद देखा जाता है उसी प्रकार अली (अ.स.) भी हैं, इन सब के अलावा वह बच्चा जो काफ़िर माँ बाप से पैदा हो वह सभी मुसलमानों के नज़दीक काफ़िर ही कहलाएगा। (मिनहाजुस-सुन्नत, जिल्द 8, पेज 285)
एक और जगह इब्ने तैमिया लिखता है कि, हक़ीक़त में राफ़ज़ी (वहाबी शियों को इस नाम से पुकारते हैं) अली (अ.स.) के ईमान और अदालत को साबित नहीं कर सकते, अगर वह यह कहें कि उनका इस्लाम, हिजरत और अल्लाह की राह में जेहाद हदीसों में तवातुर (यानी इतने अधिक रावियों द्वारा नक़्ल हो कि यक़ीन पैदा हो जाए) के साथ बयान हुआ है, तो मैं इनके जवाब में कहूँगा, माविया, यज़ीद और बनी उमय्या और बनी अब्बास के हाकिमों का इस्लाम भी तवातुर के साथ नक़्ल हुआ है। (मिनहाजुस-सुन्नत, जिल्द 2, पेज 62) एक और जगह कहता है, इतिहास में कुफ़्फ़ार और मुनाफ़िक़ों का अली (अ.स.) से दुश्मनी का कोई ज़िक्र नहीं मिलता। (मिनहाजुस-सुन्नत, जिल्द 7, पेज 461) और उसकी दुश्मनी की हद तो देखिए कि कहता है, इस्लाम के दुश्मन के विरुध्द जंगों में इमाम अली की बहादुरी का ज़िक्र सब झूठ है। (मिनहाजुस-सुन्नत, जिल्द 8, पेज 97)
इसकी दुश्मनी इमाम से इस हद तक बढ़ गई थी कि सुन्नियों के महान आलिम जिन्हें वह लोग इल्मी मैदान में मील का पत्थर समझते हैं और उन्हें सभी हाफ़िज़ (कि जिसको कम से कम 1 लाख सहीह हदीसें रावियों के नाम के साथ याद हों) कहते हैं, जिनका नाम इब्ने हजर असक़लानी है, वह इब्ने तैमिया के बारे में इस प्रकार लिखते हैं कि, कुछ लोग अपनी जेहालत के कारण इमाम अली अ.स. का अपमान करते हैं, ऐसे लोग मुनाफ़िक़ हैं, यह लोग इमाम अली अ.स. पर आरोप लगाते हैं कि उन्होंने हुकूमत और ख़िलाफ़त को पाने के लिए कई बार प्रयास किया लेकिन किसी ने भी साथ नहीं दिया, यह लोग आप के द्वारा दीन के दुश्मनों से लड़ी जाने वाली जंगों के बारे में कहते हैं कि यह जंगें को हुकूमत हासिल करने के लिए लड़ी गयीं, और इब्ने तैमिया के अनुसार अबू बकर का इस्लाम अली के बचपन में लाए हुए इस्लाम से अधिक अहमियत रखता है, क्योंकि बचपन में लाए हुए ईमान का कोई महत्व नहीं है, इब्ने हजर के अनुसार इस प्रकार की बातें मुनाफ़िक़ की पहचान हैं, क्योंकि पैग़म्बर ने इमाम अली अ.स. से फ़रमाया ऐ अली (अ.स.) तुम्हारा दुश्मन मुनाफ़िक़ है। (अद्दुररोल कामेलह फ़ी आयानिल मेअतिस-सामेनह, इब्ने हजर असक़लानी, जिल्द 1, पेज 179 से 181 तक)
इब्ने तैमिया और वहाबियों की बे बुनियाद बातों को जवाब इब्ने तैमिया ने अमीरुल मोमेनीन इमाम अली अ.स. का जिस प्रकार अपमान किया है इस से कोई भी उसकी हक़ीक़त को समझ सकता है, जैसाकि सुन्नियों के महान आलिम मन्नावी ने अपनी किताब फ़ैज़ुल-क़दीर में पैग़म्बर की इस हदीस कि अली (अ.स.) हक़ के साथ हैं और हक़ अली (अ.स.) की इस प्रकार तफ़सीर की है....
“यही कारण है कि अली (अ.स.) के पास क़ुर्आन की तफ़सीर का सब से अधिक ज्ञान है, तभी इब्ने अब्बास जैसे क़ुर्आन की तफ़सीर करने वाले को भी कहना पड़ा कि मेरे पास तफ़सीर का जो भी ज्ञान है वह मैं ने इमाम अली अ.स. से हासिल किया है।“ (फ़ैज़ुल-क़दीर, जिल्द 4, पेज 357) इसी प्रकार इब्ने तैमिया ने इमाम अली अ.स. की जिस महानता का इंकार किया है उसी को अहले सुन्नत के बड़े बड़े आलिमों ने स्वीकार किया है, जिसके कुछ नमूने हम यहाँ पेश कर रहे हैं।
1. इबने तैमिया ने क़ुर्आन की मशहूर आयत जिसे आयते विलायत कहा जाता है उसके इमाम अली अ.स. की शान में नाज़िल होने का इंकार किया है (मिनहाजुस-सुन्नत, जिल्द 2, पेज 30) जबकि अहले सुन्नत के 64 से अधिक मुफ़स्सिरों ने विस्तार से लिखा है कि यह आयत इमाम अली अ.स. की शान में नाज़िल हुई है। (पढ़ेः अल-ग़दीर, जिल्द 3, पेज 156-172) 2. क़र्आन की मशहूर आयत आयते मवद्दत के बारे में भी इसका कहना था कि यह रिसालत के घराने और ख़ानदान के बारे में नहीं नाज़िल हुई, (मिनहाजुस-सुन्नत, जिल्द 2, पेज 118) जबकि अहले सुन्नत के 45 मुफ़स्सिरों से अधिक ने लिखा है कि आयते मवद्दत अहले बैत अ.स. की शान ही में नाज़िल हुई है। (पढ़ेः अल-ग़दीर, जिल्द 3, पेज 156-172)
3. पैग़म्बर की इमाम अली अ.स. के बारे में हदीस कि “वह मेरे बाद हर मोमिन के सरपरस्त (अभिभावक) हैं” वह कहता है कि यह पैग़म्बर के नाम पर झूठी बात गढ़ी गई है, (मिनहाजुस-सुन्नत, जिल्द 7, पेज 391) जबकि बहुत सारे सहाबी, हाफ़िज़ और मोहद्दिसों ने इस हदीस को पैग़म्बर से नक़्ल किया है, और यह हदीस सुन्नियों की अहम किताबों में मौजूद है। (मुसनदे अहमद, जिल्द 1, पेज 331, सोनने तिरमिज़ी, जिल्द 5, पेज 297, सहीह इब्ने हब्बान, जिल्द 15, पेज 374, अल-मुसतदरक अलस-सहीहैन, जिल्द 3, पेज 119, अलएसाबह, जिल्द 4, हदीस 4677)
इब्ने तैमिया की बे बुनियाद बातों के जवाब में केवल अलबानी जो ख़ुद वहाबी है उसका यह जवाब ही काफ़ी है, वह इस हदीस के बारे में कहता है कि, तअज्जुब है कि शैख़ुल इस्लाम इब्ने तैमिया की अपनी किताब मिनहाजुस-सुन्नत में इस हदीस के इंकार करने की कैसे हिम्मत हो गई, जबकि और भी बहुत सी हदीसों के बारे में उसने यही किया है, मेरे द्रष्टिकोंण से इस हदीस के इंकार करने का शियों से दुश्मनी के अलावा और कोई कारण नहीं है, क्या उसका इमाम अली अ.स. की महानता जिस पर सारे मुसलमान एकमत हैं उसका इंकार कर देना, और इमामुल मुत्तक़ीन की ओर झूठी बातें गढ़ देना सहीह मुस्लिम की इस हदीस की तफ़सीर के अलावा भी कुछ है कि इमाम अली अ.स. ने क़सम के साथ फ़रमाया कि, पैग़बर ने मेरे बारे फ़रमाया कि मुझे वही पसंद करेगा जो मोमिन होगा और मुझ से वही नफ़रत और दुश्मनी करेगा जो मुनाफ़िक़ होगा। (सहीह मुस्लिम, जिल्द 1, किताबुल-ईमान, पेज 60) केवल यही नहीं इब्ने तैमिया ने पैग़म्बर और उनके बहुत से सहाबी और मुसलमानों के ख़ुल्फ़ा का बार बार अपमान किया है जिसको विस्तार से जानने के लिए उसकी किताब मिनहाजुस-सुन्नत को पढ़ा जा सकता है, ध्यान रहे इसने यह केवल वहाबी विचार को फैलाने और अहले बैत अ.स. से दुश्मनी के कारण यह सब कुछ किया वरना आपके सामने अहले सुन्नत के बड़े बड़े आलिमों द्वारा उसका जवाब दिया गया है।


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