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Date of publication : 21/6/2017 16:47
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यौमे क़ुद्स आयतुल्लाह ख़ामेनई के बयान में।

साम्राज्यवादी, ज़ायोनीस्ट, मानवता के दुशमनों जो फ़िलिस्तीन को मिटाने का प्रयास कर रहे हैं और उनका किसी भी प्रकार का साथ देने वाले के मुँह पर ज़ोरदार तमाँचा है

विलायत पोर्टल :
ईरानी जनता फ़िलिस्तीन की समर्थक : यौमे क़ुद्स का सम्मान कीजिए, और उसमें ज़रूर शामिल रहिये, जो लोग फ़िलिस्तीन की जेल में अत्याचार का शिकार हैं उन्होंने हम से कहा है कि आप की रैलियों और नारों से आपकी नियत, सच्चाई और इरादों का पता चलता है जिस से हम लोगों को ताक़त का एहसास होता और प्रतिरोध और दुश्मन से लड़ने की ऊर्जा मिलती है, इसलिए जो फ़िलिस्तीनी जेलों की दीवारों के पीछे अत्याचार का शिकार हैं उन्हें तन्हाई का एहसास न होने दें, वह मर्द और औरतें जो बैतुल मुक़द्दस और ग़ज़्ज़ा की गलियों और मोहल्लों में ज़ायोनी दरिंदों के अत्याचारों का शिकार हो रहें हैं उन्हें आप से उम्मीद रहनी चाहिए ताकि वह दुश्मनों से डट कर मुक़ाबला कर सकें। (ख़ुतबए जुमा, आयतुल्लाह ख़ामेनई, 5 अप्रैल 1991)
फ़िलिस्तीनियों को विश्व समुदाय के समर्थन की आशा : अफ़सोस के साथ कहना पड़ रहा है चूँकि ज़ायोनी दरिंदो को उनके अत्याचार के लिए पूरे विश्व का समर्थन मिलता है, यहाँ तक कि बहुत से देशों ने उनकी नाज़ुक स्थिति को देखते हुए और उनके अत्याचार विरोधी नारों को देखते हुए भी उन्हें उसी स्थिति में छोड़ दिया, और आज फ़िलिस्तीनी जनता आशा भरी निगाहों से मुसलमानों के बीच अपने समर्थकों को तलाश कर रही है, मैं अपने देश की प्यारी जनता और इसी प्रकार पूरे विश्व के मुसलमानों से अपील करता हूँ कि इस साल की रैली को पिछले सालों से और अधिक सफ़ल बनाएँ, क्योंकि आप के रैली में शामिल होने से उनके इरादों को मज़बूती मिलेगी और वह बुलंद हौसलों के साथ बैतुल मोक़द्दस की रक्षा करेंगे, और उनकी जीत उस समय होगी जब उनकी धरती ज़ायोनी दरिंदों के ना पाक क़दम से पाक हो जाएगी। (क़ुद्स के अवसर पर 18 मार्च 1993 को आपका बयान टी.वी. द्वारा प्रसारित हुआ)
फ़िलिस्तीन की रक्षा में मुसलमानों की एकता की अहमियत : सभी मुसलमानों को चाहिए कि एकमत हो कर ज़ायोनी दरिंदगी की निंदा करें, एक साथ आलोचना करें, एक साथ मिल कर जवाब तलब करें, फ़िलिस्तीन के सभी मसलों का एकजुट हो कर हल तलाश करें, और एक साथ मिल कर ही उनके घर में उनकी सुरक्षा का बंदोबस्त करें, यह और बात है कि अगर दुनिया के सारे मुसलमानों ने अपने घर में परदेसियों की तरह रहने वालों का साथ नहीं दिया तब भी वह अपने बुलंद हौसलों से अपने देश में सुरक्षा व्यव्स्था ले आएंगे, और यह काम इस्लामी तालीमात के साथ ही हो सकता है। ( आप के द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों के बीच दिया गया बयान, 13 मार्च 1994)
क़ुद्स दिवस दुश्मन के मुँह पर ज़ोरदार तमाँचा : क़ुद्स दिवस बहुत अहम है, यही कारण है कि पिछले कई वर्षों से इसे भुलाने का प्रयास किया जा रहा है, क़ुद्स इस प्रकार के प्रयास करने वालों के दिलों पर एक तीर है, और साम्राज्यवादी, ज़ायोनीस्ट, मानवता के दुशमनों जो फ़िलिस्तीन को मिटाने का प्रयास कर रहे हैं और उनका किसी भी प्रकार का साथ देने वाले के मुँह पर ज़ोरदार तमाँचा है, इसी लिए क़ुद्स की अहमियत को समझें, ध्यान रहे यह केवल ईरानी जनता से विशेष नहीं है, बल्कि क़ुद्स को दुनिया के अधिकतर देशों में मोमिन मुसलमान पूरे जोश और हौसले के साथ अपनी अपनी परिस्थिति के अनुसार (कुछ देशों में सरकार क़ुद्स रैली की अनुमति नहीं देती) क़ुद्स की रैली करते और उस में शामिल होते हैं, मुझे उम्मीद है कि इस बार भी पूरी दुनिया के मुसलमान क़ुद्स की रैलियों में शामिल हो कर साम्राज्य और ज़ायोनी राष्ट्र के मुँह पर हर बार से ज़ोरदार तमाँचा मारेंगे। ( आप का 8 जनवरी 1999 को नमाज़े जुमा के ख़ुतबे में बयान)
क़ुद्स अत्याचार के विरुध्द मुसलमानों के विरोध को प्रतीक : क़ुद्स का दिन आने वाला है, यह दिन इस्लामी उम्मत पर पिछले पचास साल से होने वाले अत्याचार के विरुध्द मुसलमानों के विरोध का प्रतीक है, यौमे क़ुद्स का पूरे इस्लामी समाज को सम्मान करना चाहिए, क्योंकि यह रैली और विरोध मुसलमान होने के कारण नहीं है बल्कि अन्याय, अत्याचार और क्रूरता के विरुध्द एक क़दम है। (जुमे के ख़ुतबे में आपका बयान, 13 अक्टूबर, 2006)
क़ुद्स की रैली में शामिल होना फ़िलिस्तीनी जनता के हौंसलों की बुलंदी का कारण : इस्लाम दुश्मन साम्राज्य फ़िलिस्तीन मसले से पूरे विश्व समुदाय का ध्यान बँटा देना चाहता है, लेकिन लोगों का रैली में शामिल होना उनके इस इरादे को हर साल नाकाम बना कर फ़िलिस्तीनी जनता के हौंसलों को बुलंद करता है, फ़िलिस्तीनी जनता हर प्रकार के प्रतिबंध के बावजूद पूरे साम्राज्य के मुक़ाबले डटे हुए हैं, और वह जानते हैं कि वह ख़ुद ही अपने नागरिकों को साम्राज्य के अत्याचारों से बचा सकते हैं, और इस्लामी उम्मत का समर्थन और रैलियाँ उनके हौसले और इरादे को मज़बूती देगा। (आपका ईद के ख़ुतबे में बयान, 13 अक्टूबर, 2007)
फ़िलिस्तीन इस्लाम का बुनियादी मामला : आज हमारे आस पास के देशों में जो सबसे बुनियादी मामला है वह वही पुराना फ़िलिस्तीन का मामला है, और इस पर चर्चा करना बहुत अहम और ज़रूरी है, क्योंकि ज़ायोनी दरिंदों ने फ़िलिस्तीनी जनता पर हमलों में काफ़ी बढ़ोत्तरी कर दी है, और उनका ऐसा करना उनकी अपनी अंदरूनी कमज़ोरी का ज़ाहिर करना और अपनी हार स्वीकार करना है, वह अपनी झूठी शक्ति को और झूठे दावे को साबित नहीं कर सके, और अरब जगत में बिठाए गए ख़ौफ़ को हिज़्बुल्लाह और हमास के जाँबाज़ लड़ाकों द्वारा दूर करने बाद अपनी खिसियाहट फ़िलिस्तीनी जनता पर अत्याचार कर के दूर कर रहे हैं, फ़िलिस्तीन में मौजूदा सरकार क़ानूनी है, और पूरी दुनिया को जनता द्वारा चुनी गई सरकार को स्वीकार करना अनिवार्य है। (जुमे के ख़ुतबे में आपका बयान, 19 सितम्बर 2008)


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