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Date of publication : 31/5/2017 16:59
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क़ुर्आन क्यों पढ़ा जाए?

इमाम अली अ.स. फ़रमाते हैं कि, क़ुर्आन की तिलावत ईमान की मज़बूती और ताज़ा रहने का कारण है।

विलायत पोर्टल :
 
क़ुर्आन अल्लाह की ऐसी अहम किताब है जिस की आयतें इंसान के इस जीवन और आखेरत को सफ़ल बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं, लेकिन कभी इसी किताब को जीवन से हटा कर किनारे कर दिया जाता है, और इंसानी जीवन में इतनी बरकत और अहमियत के बावजूद लोग इस से अनजान बन जाते हैं, जबकि इंसान अगर सच में अल्लाह की इस अहम किताब को पढ़ने के लाभ को समझ ले तो क़ुर्आन हमेशा उस के जीवन मे शामिल रहेगा। इस लेख में आप के सामने क़ुर्आन पढ़ने और उसकी आयतों में विचार करने के ऐसे ही कुछ फ़ायदों को पेश किया जा रहा है।
 गुनाहों का कफ़्फ़ारा इंसान कभी कभी अपने जीवन में छोटे बड़े गुनाह और पाप के रास्ते पर चला जाता है, और कभी इन गुनाहों का कफ़्फ़ारा देना पड़ता है, हदीस में मिलता है कि क़ुर्आन की तिलावत गुनाहों का कफ़्फ़ारा है, मासूम फ़रमाते हैं कि, क़ुर्आन पढ़ो, इसलिए कि इस से गुनाह और पाप धुलते हैं, और कुर्आन की तिलावत अल्लाह के अज़ाब से बचाती है। ( वसाएलुश-शिया, जिल्द 4, पेज 839)
ईमान की मज़बूती इमाम अली अ.स. फ़रमाते हैं कि, क़ुर्आन की तिलावत ईमान की मज़बूती और ताज़ा रहने का कारण है। ( ग़ोरारुल-हिकम, पेज 263) ईमान की मज़बूती और उसकी उन्नति के अहम कारणों में से क़ुर्आन की तिलावत है। अल्लाह से बातों का ज़रिया एक मोमिन इंसान के लिए इस से बड़ी और क्या उप्लब्धि हो सकती है कि उसे अपने असली मालिक और रब से बात करने का मौक़ा मिले, और यह मौक़ा क़ुर्आन की तिलावत से बेहतर क्या हो सकता है। अल्लाह के आख़िरी नबी हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा स.अ. फ़रमाते हैं कि, जो यह चाहता है कि अल्लाह से बाते करे उसको चाहिए कि वह क़ुर्आन पढ़े। (कन्ज़ुल-उम्माल, जिल्द 21, पेज 510)
घर में रौशनी अपने घरों को क़ुर्आन की तिलावत से रौशन करो, वह घर जिसमें क़ुर्आन अधिक पढ़ा जाता है उस घर में अल्लाह की बरकतें भी अधिक होतीं हैं, और उस घर की रौशनी आसमान को इस प्रकार रौशन कर देता है जैसे आसमानी सितारे ज़मीन को रौशन करते हैं। (उसूले काफ़ी, जिल्द 2,पेज 610) दुनिया में बहुत से ऐसे लोग हैं जो अपने जीवन में रौशनी, बकरत और रिज़्क़ में बढ़ोतरी केवल क़ुर्आन की तिलावत के कारण ही जानते हैं। पैग़म्बर फ़रमाते हैं कि, अपने घरों को क़ुर्आन की तिलावत से रौशन करो, और यहूदियों और ईसाइयों की तरह केवल पूजा घरों में इबादत को सीमित मत करो और घर को क़ब्रिस्तान मत बनाओ, जिस घर में क़ुर्आन की तिलावत अधिक की जाती है उस घर के लोग अधिक समय तक इसका लाभ उठाते रहेंगे, और यह घर आसमान वालों को वैसे ही रौशनी देगा जैसे सितारे ज़मीन वालों को अपनी रौशनी से लाभ पहुँचाते हैं। (बिहारुल-अनवार, जिल्द 89, पेज 204)
सफ़लता पैग़म्बरे इस्लाम स.अ. फ़रमाते हैं कि, अगर सफ़ल जीवन, शहादत, घबराहट के दिनों में सुकून, अंधेरों में उजाला, भयानक गर्मी में छाँव, प्यास में पानी, नेक आमाल में वज़न और बुरे आमाल को हल्का करना चाहते हो तो क़ुर्आन की तिलावत करो, क्योंकि क़ुर्आन का ध्यान पूर्वक पढ़ना मेहेरबान ख़ुदा की याद को हमारे दिलों में बढ़ाता है और शैतान से दूर रखता है, और क़यामत के दिन नेक आमाल के वज़नी होने का कारण बनता है। (मीज़ानुल-हिकमा, जिल्द 8, पेज 74) दुआ का क़ुबूल होना इमाम हसन अ.स. फ़रमाते हैं कि, जो भी क़ुर्आन की तिलावत करेगा, फ़ौरन या कुछ देर से सही लेकिन उसकी दुआ क़ुबूल होगी। (बिहारुल अनवार, जिल्द 89, पेज 204) सुकूनी ने इमाम सादिक़ अ.स. से नक़्ल किया है, पैग़म्बर से पूछा गया कि, सबसे अच्छे कौन लोग हैं? आप ने फ़रमाया, जो क़ुर्आन को पढ़ना शुरू करे और फ़िर उसे उसी प्रकार उसे धीरज के साथ ख़त्म करे। (सवाबुल-आमाल, पेज 199)
वालेदैन की मग़फेरत और आँखों का नूर इमाम सादिक़ अ.स. से हदीस नक़्ल है कि, जो कोई क़ुर्आन को देख कर पढ़े उसकी आँखों की रौशनी बढ़ेगी और उसके वालेदैन के अज़ाब में कमी होगी चाहे वह काफ़िर ही क्यों न हों। (सवाबुल-आमाल, पेज 268) यहाँ एक बात बता देना ज़रूरी है कि क़ुर्आन की तिलावत का मतलब केवल क़ुर्आन सामने रख कर जल्दी जल्दी ख़त्म कर देना नही है, बल्कि तिलावत का मतलब ही क़ुर्आन को ध्यान पूर्वक पढ़ना है। (मुफ़रदाते राग़िब, पेज 167) इसलिए अगर कोई ऊपर दी गई उप्लब्धियों को हासिल करना चाहता है उसे क़ुर्आन को ध्यान पूर्वक पढ़ना होगा यानी उसको मानी और मतलब में विचार करना होगा।


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