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Date of publication : 30/5/2017 16:57
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क़ुर्आन पढ़ने के आदाब।

तिलावत के समय ध्यान रहे कि उस से किसी को कष्ट न हो। तिलावत के समय साफ़ सुथरे कपड़े पहनें, ता कि पाकीज़गी का एहसास रहे।

विलयत पोर्टल :
  इस्लाम में नमाज़ रोज़े से लेकर सोने खाने और भी बहुत से आमाल के आदाब और अहकाम बयान किए गए हैं, जिन पर अमल करना कभी वाजिब और कभी मुसतहब होता है। इन्हीं अहकाम और आमाल में से रमज़ान के महीने में क़ुर्आन पढ़ना है, जिस की हदीस में बहुत ताकीद हुई है, और उसके आदाब भी बताए गए हैं, जिनमें से कुछ वाजिब और कुछ मुसतहब हैं, जिनमें से कुछ का हम यहाँ ज़िक्र करेंगे। ध्यान रहे, जितने आहकाम और आदाब यहाँ ज़िक्र किए जाएँगे वह क़ुर्आन की आयतों और अहले बैत की हदीसों द्वारा बताए गए हैं।
1. क़ुर्आन पढ़ते समय बा वुज़ू रहना चाहिए, क्योंकि इसके बिना अगर पढ़ते समय क़ुर्आन को छूने की आवश्यकता हुई तो हम नहीं छू सकते, बिना वुज़ू क़ुर्आन को छूना हराम है।
2. क़ुर्आन पढ़ने से पहले मिसवाक करना और ख़ुशबू लगाना बहुस सवाब रखता है।
3. क़ुर्आन पढ़ते समय क़िबले की ओर मुँह कर के बैठना बेहतर है।
4. क़ुर्आन पढ़ते समय उसके सम्मान को ज़रूर ध्यान में रखें।
5. याद रहे कि क़ुर्यान पढ़ते समय अगर सूरए सजदा आयत 15, सूरए फ़ुस्सेलत आयत 37, सूरए नज्म आयत 62 और सूरए अलक़ आयत 19 में से अगर किसी की तिलावत की (या सुनी) तो उसी समय सजदा करना वाजिब है, जैसा कि क़ुर्आन में इन आयतों के किनारे लिखा भी होता है, और अगर भूल जाएं तो जैसे ही याद आए उसी समय सजदा करना वाजिब है।
6. आयतों की तिलावत से पहले अऊज़ो बिल्लाह.... (اعوذ باللہ) और बिस्मिल्लाह पढ़ें।
7. अल्लाह से दुआ करें कि वह हमें तिलावत का हक़ अदा करने की तौफ़ीक़ दे, क्यों कि क़ुर्आन की तिलावत की तौफ़ीक़ बिना उसकी मदद और उसके आशिर्वाद के नहीं मिल सकती।
8. क़ुर्आन की तिलावत के समय पूरा ध्यान उसी की ओर हो, और पूरी विनम्रता के साथ तिलावत की जाए, किसी प्रकार की हँसी मज़ाक़ नही होना चाहिए, बल्कि इस प्रकार तिलावत हो जैसे अल्लाह से बातें कर रहे हों।
9. तिलावत के समय क़ुर्आन को ज़मीन पर न रखें, बल्कि उसे किसी रेहेल या हाथों में ले कर बैठें, ता कि हम को क़ुर्आन का सम्मान करने वालों में शुमार किया जा सके।
10. तिलावत के समय ध्यान रहे कि उस से किसी को कष्ट न हो।
11. तिलावत के समय साफ़ सुथरे कपड़े पहनें, ता कि पाकीज़गी का एहसास रहे।
12. क़ुर्आन को रुक रुक कर आराम से पढ़ें।
13. कोशिश करें कि क़ुर्आन को अरबी लहेन में पढ़ें।
14. क़ुर्आन पढ़ते समय वाजिब हुक्म पर अमल और हराम अमल से रुकने का निष्चय करें।
15. जो तिलावत करें उसका सवाब पैग़म्बर, मासूमीन, औलिया, वालेदैन और रिश्तेदारों को बख़्श दें।
16. क़ुर्आन पढ़ने की तौफ़ीक़ मिलने पर अल्लाह का शुक्र अदा करें।


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