Delicious facebook RSS दोस्तों को भेजें। प्रिंट सेव करें। XML TEXT PDF
Code : 185747
Date of publication : 18/2/2017 0:15
Hit : 2889

इमाम हुसैन अ. और आशूरा का अपमान करने वालों से दोस्ती नही करेगी ईरानी जनताः आयतुल्लाह ख़ामेनई

कुछ लोगों की ओर से राष्ट्रीय पुनर्मिलन की बात ग़लत है इसलिए की पुनर्मिलन की बात तब होती है जब आपस में कोई लड़ाई हो और आज पूरी ईरानी जनता एक है .....


विलायत पोर्टलः 18 फ़रवरी 1978 के तबरीज़ की जनता के आंदोलन की वर्षगांठ के अवसर पर बुधवार को तेहरान में पूर्वी आज़रबाइजान प्रांत की क्रान्तिकारी जनता के विभिन्न वर्गों के हज़ारों लोगों ने आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई से मुलाक़ात की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि जो यूरोपीय अधिकारी ईरानी अधिकारियों से यह कहते हैं कि अगर जेसीपीओए न होता तो ईरान के ख़िलाफ़ जंग निश्चित थी निरा झूठ है।
सुप्रीम लीडर ने आर्थिक जंग, पाबंदी, ईरान में काम व प्रौद्योगिकी के अवसर को ख़त्म करना, और सांस्कृतिक जंग को वास्तविक जंग बताते हुए कहा कि दुश्मन जनता के मन को जंग की ओर मोड़ कर इन विषयों की ओर से ध्यान भटकाना चाहते हैं।
सुप्रीम लीडर ने 10 फ़रवरी को इस्लामी क्रान्ति की वर्षगांठ पर आयोजित राष्ट्रव्यापी रैली में जनता की भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि इस्लामी क्रान्ति की तीसरी और चौथी पीढ़ी दुश्मन के मुक़ाबले में डट कर अपनी बात पूरी दृढ़ता से कहती है।
उन्होंने कहा कि आज दुश्मन इस कोशिश में है कि ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव डाले ताकि जनता का मन मुश्किल में फंस का उचाट हो जाए।
उन्होंने के कुछ लोगों की ओर से राष्ट्रीय पुनर्मिलन की बात ग़लत है इसलिए की पुनर्मिलन की बात तब होती है जब आपस में कोई लड़ाई हो और आज पूरी ईरानी जनता एक है आपस में कोई कलह या लड़ाई नहीं रखती इसलिए मीडिया का राष्ट्रीय पुनर्मिलन की बात करना सही नहीं है हां यह और बात है कि जिन्होंने इमाम हुसैन अ. और आशूरा का अपमान किया है और आशूर के सम्मान की अनदेखी की है ईरानी जनता कभी भी उनसे हाथ नहीं मिला सकती। हालांकि उनकी संख्या न के बराबर है लेकिन फिर भी उनसे दोस्ती सम्भव नहीं है।



आपका कमेंट



मेरा कमेंट शो न किया जाये
Security Code :

नवीनतम लेख

भारत पहुँच रहा है वर्तमान का यज़ीद मोहम्मद बिन सलमान, कई समझौतों पर होंगे हस्ताक्षर । ईरान के कड़े तेवर , वहाबी आतंकवाद का गॉडफादर है सऊदी अरब अर्दोग़ान का बड़ा खुलासा, आतंकवादी संगठनों को हथियार दे रहा है नाटो। फिलिस्तीन इस्राईल मद्दे पर अरब देशों के रुख में आया है बदलाव : नेतन्याहू बहादुर ख़ानदान की बहादुर ख़ातून यह 20 अरब डॉलर नहीं शीयत को नाबूद करने की साज़िश की कड़ी है पैग़म्बर स.अ. की सीरत और इमाम ख़ुमैनी र.अ. की विचारधारा शिम्र मर गया तो क्या हुआ, नस्लें तो आज भी बाक़ी है!! इमाम ख़ुमैनी र.ह. और इस्लामी इंक़ेलाब की लोकतांत्रिक जड़ें हज़रत फ़ातिमा ज़हरा स.अ. के घर में आग लगाने वाले कौन थे? अहले सुन्नत की किताबों से एक बेटी ऐसी भी.... फ़र्ज़ी यूनिवर्सिटी स्थापित कर भारतीय छात्रों को गुमराह कर रही है अमेरिकी सरकार । वह एक मां थी... क़ुर्आन को ज़हर बता मस्जिदें बंद कराने का दम भरने वाले डच नेता ने अपनाया इस्लाम । तुर्की के सहयोग से इदलिब पहुँच रहे हैं हज़ारो आतंकी ।