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Date of publication : 15/2/2017 21:8
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रसूले इस्लाम स.अ. ने हज़रते ज़हरा अ. को उम्मे अबीहा (अपने बाप की माँ) क्यूं कहा?

पैग़म्बर एक पेड़ के जैसे हैं जिसका तना इमामे अली अ. जड़ हज़रते ज़हरा अ. जिसके फल इमामे हसन अ. और इमामे हुसैन अ. जिसके पत्ते और डालियां आप के शिया हैं



विलायत पोर्टलः हज़रते ज़हरा को उम्मे अबीहा कहे जाने के बारे में अलग अलग तरह के नज़रिये पाए जाते हैं।
पहला यह कि अरब वासी तीन तरह से नाम रखते हैं, 1. नाम 2. लक़ब (उपनाम) 3. कुन्नियत (उपाधि)।
जैसे हज़रत फ़ातिमा ज़हरा अ. का नाम फ़ातिमा, लक़ब ज़हरा और कुन्नियत उम्मे अबीहा थी, आपके नाम के अलावा बहुत सारे लक़ब और कुन्नियत भी थीं, कुन्नियत का चयन किसी ख़ास वजह से भी हो सकता है।
इस कुन्नियत की वजह मोहब्बत ज़ाहिर करना भी हो सकता है, जैसा कि कुछ मुल्कों में बाप अपनी बेटी से ज़्यादा मोहब्बत को ज़ाहिर करने के लिए मां और बेटे को बाप के लिए इस्तेमाल होने वाले शब्द से पुकारता है, इसी तरह पैग़म्बरे इस्लाम स.अ ने अपनी बेटी से मोहब्बत को ज़ाहिर करते हुए अपनी बेटी के लिए कहा कि तुम अपने बाप की मां हो।
दूसरा कारण यह हो सकता है कि इस्लाम का प्रारंभिक दौर जो पैग़म्बरे इस्लाम स. के लिए बहुत अजनबी दौर था उसमें हज़रते ज़हरा अ. का व्यवहार अपने बाप के लिए मां जैसा था। (ज़िंदेगानि-ए-हज़रते फ़ातिमा ज़हरा, जाफ़र शहीदी, पेज 40) और पैग़म्बरे इस्लाम स.अ. का व्यवहार भी आपसे बिल्कुल बेटे जैसा था।
पैग़म्बरे इस्लाम स. आपके हाथों को चूमते थे, जब सफ़र पर जाते तो सबसे आख़िर में आपसे मिल कर जाते, वापसी पर सबसे पहले आपसे मिलते, आप भी एक मां की तरह उनसे व्यवहार करती थीं, जंग से वापसी पर अगर ज़ख़्मी हुए तो उनकी मरहम पट्टी करतीं, इस तरह दोनों तरफ़ का व्यवहार मां बेटे जैसा ही था।
कहा जाता है कि हर चीज़ की जड़ और बुनियाद उसकी मां की हैसियत रखती है, यहां पर भी यही संभव है क्योंकि आपको भी हदीसों में रिसालत की जड़ और बुनियाद कहा गया है, जैसा कि इरशाद होता है पैग़म्बर एक पेड़ के जैसे हैं जिसका तना इमामे अली अ. जड़ हज़रते ज़हरा अ. जिसके फल इमामे हसन अ. और इमामे हुसैन अ. जिसके पत्ते और डालियां आप के शिया हैं।
जिस तरह जड़ के न होने से पेड़ सूख जाता है उसी तरह अगर हज़रत ज़हरा न होतीं तो रिसालत नाम का पेड़ सूख के रह जाता।
और यह भी संभव है कि क्यों कि पैग़म्बरे इस्लाम की बीवियों को उम्मुल मोमेनीन की कुन्नियत दी जिसका मतलब सारे मोमेनीन की मां होता है, इसी लिए आपको उम्मे अबीहा की कुन्नियत दी ताकि उम्मुल मोमिनीन के मन में यह बात न आने पाए कि हमारा स्थान सबसे ऊंचा है, बल्कि अगर आप लोग मोमिनीन की मां हैं तो हज़रत ज़हरा अ. का स्थान यह है कि आप उम्मत के पैग़म्बर की मॉं हैं। (फ़ातिमा ज़हरा अ. शादमानिए दिले पैग़म्बर, अहमद रहमानी, पेज )।
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