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Code : 184845
Date of publication : 31/12/2016 17:16
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ईरान और रूस सीरिया संकट के हल के लिए कोशिशें जारी रखेंगे।

ईरान के विदेशमंत्री मुहम्मद जवाद ज़रीफ़ और रूस के विदेशमंत्री सर्गेई लावरोफ़ ने टेलीफ़ोनी वार्ता में सीरिया संकट के समाधान के लिए प्रयास जारी रखने और सीरिया के मामले में संयुक्त राष्ट्र संघ के विशेष राजदूत स्टीफ़न डी मिस्तूरा के साथ समन्वय बनाए रखने पर ज़ोर दिया है।
विलायत पोर्टलः ईरान के विदेशमंत्री मुहम्मद जवाद ज़रीफ़ और रूस के विदेशमंत्री सर्गेई लावरोफ़ ने टेलीफ़ोनी वार्ता में सीरिया संकट के समाधान के लिए प्रयास जारी रखने और सीरिया के मामले में संयुक्त राष्ट्र संघ के विशेष राजदूत स्टीफ़न डी मिस्तूरा के साथ समन्वय बनाए रखने पर ज़ोर दिया है। यह टेलीफ़ोनी वार्ता ऐसी स्थिति में हुई कि रूस के राष्ट्रपति विलादीमीर पुतीन ने गुरूवार को घोषणा की थी कि सीरिया में संघर्ष विराम, तेहरान, मास्को और अंकारा के बीच हुई सहमति का परिणाम है। उन्होंने गुरूवार को रूस के विदेशमंत्री सर्गेई लावरोफ़ और रक्षा मंत्री सर्गेई शाइगो के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सीरिया में संघर्ष विराम, ईरान, रूस और तुर्की के समन्वय से संभव हुआ है और इसी तरह तीनों देश संयुक्त रूप से इसको लागू करने को सुनिश्चित भी करेंगे। इसी तरह ईरान के विदेशमंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने सीरिया में होने वाले युद्धविराम समझौते के क्रियान्वयन का स्वागत करते हुए इस सहमति को बड़ी व महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। विदेशमंत्री जवाद ज़रीफ़ के ट्वीटर संदेश में आया है कि सीरिया में युद्धविराम सहमति एक बड़ी उपलब्धि है कि इस अवसर का फ़ायदा उठाकर आतंकवाद की जड़ों को लक्ष्य बनाया और सीरिया संकट के समाधान के मार्ग को प्रशस्त किया जा सकता है। क्षेत्रीय परिवर्तनों पर नज़र डालने से यह पता चलता है कि इराक़ पर अमेरीका और ब्रिटेन के भीषण हमले और मध्यपूर्व में पश्चिम का सैन्य हस्तक्षेप, आतंकवाद को समाप्त नहीं कर सका और सुरक्षा तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था की स्थापना के बजाए, मानवीय त्रासदी, अलक़ायदा और आईएस ने इन देशों और क्षेत्र को अपने चंगुल में जकड़ लिया। अब प्रश्न यह होता है कि इन देशों की जनता का भविष्य क्या होगा? क्या पश्चिमी देशों द्वारा आतंकवाद के समर्थन पर हाथ पर हाथ धरे बैठे रहा जाए और उन्हें खुली छूट दे दी जाए कि उनकी जो मर्ज़ी में आए करें? जब आईएस ने लोगों को ज़िंदा जलाया और बड़ी निर्ममता से उनकी गर्दनें मार दी तो मानवाधिकार के दावेदार आतंकियों के समर्थकों ने कुछ भी नहीं किया लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है और सीरिया में राजनैतिक समाधान का मार्ग प्रशस्त हो चुका है।
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तेहरान रेडियो


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