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Date of publication : 27/12/2016 17:29
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30 दिसंबर 2009 की घटना जनता की वैचारिक शक्ति और इस्लामी शासन व्यवस्था का एक उदाहरण हैः सुप्रीम लीडर

इस्लामी रिवाल्यूशन के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने 30 दिसंबर 2009 की घटना के अवसर पर इस अनुदाहरणीय कारनामे और जनता की वैचारिक शक्ति को इस्लामी व्यवस्था की शक्ति का एक उदाहरण बताया।
विलायत पोर्टलः इस्लामी रिवाल्यूशन के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने 30 दिसंबर 2009 की घटना के अवसर पर इस अनुदाहरणीय कारनामे और जनता की वैचारिक शक्ति को इस्लामी व्यवस्था की शक्ति का एक उदाहरण बताया। सुप्रीम लीडर ने 9 दी 1388 बराबर 30 दिसंबर 2009 के कारनामे की वर्षगांठ के पूर्व अपने एक संबोधन में इस्लाम से सम्राज्यवादियों की दुश्मनी और द्वेष तथा इस्लामी शासन व्यवस्था को समाप्त करने के उनके प्रयासों की ओर इशारा किया। आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने मंगलवार को कहा कि साम्राज्यवादी शक्तियां, इस्लामी रिपब्लिक ईरान के साथ मुक़ाबले में ईरानी राष्ट्र के संकल्प तथा उसकी भौतिक व अध्यात्मिक शक्ति छीन लेना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि इसके मुक़ाबले में इस शक्ति को सुरक्षित रखकर इसमें दिन-प्रतिदिन वृद्धि किए जाने की आवश्यकता है। इस्लामी रिवाल्यूशन के सुप्रीम लीडर ने पैग़म्बरे इस्लाम (स.अ.) के एक कथन की ओर इशारा करते हुए कहा कि मानवीय समाज में भलाई और कल्याण की प्राप्ति, शक्ति की छाया में मुमकिन है। सुप्रीम लीडर ने कहा कि इस्लाम की छाया में प्राप्त होने वाली सैन्य शक्ति और क्षेत्रीय मामलों में उसका प्रभाव, वर्चस्ववादी शक्तियों के क्रोध का कारण बना है। उन्होंने कहा कि विश्व की वर्चस्ववादी व्यवस्था, दुनिया में हर तरह की अत्याचार विरोधी प्रक्रिया का विरोध करती है लेकिन उस विरोध के मुक़ाबले में वह घुटने टेकने पर विवश हो जाती है जो अपने पूरे अस्तित्व के साथ सामने आ जाता है। आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने कहा कि ईरान द्वारा विश्व वर्चस्ववाद का विरोध, उसके ख़िलाफ़ दुश्मनी और साज़िशों की वजह बना है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इस्लामी रिपब्लिक ईरान को इस शत्रुता के मुक़ाबले के लिए अपनी शक्ति को बढ़ाना चाहिए। सुप्रीम लीडर ने कहा कि इस्लामी रिवाल्यूशन की सफलता के लगभग 40 वर्ष गुज़रने के बावजूद 22 बहमन के दिन पूरे राष्ट्र का सड़कों पर निकल आना, इस्लामी शासन व्यवस्था की शक्ति और उसके प्रभाव का परिचायक है। उन्होंने कहा कि यह बात पूरी दुनिया में अद्धितीय है। आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने 30 दिसंबर 2009 के कारनामे की घटना को व्यवस्था की शक्ति का एक और नमूना बताया। उन्होंने कहा कि इस अनुदाहरणीय घटना में जनता स्वेच्छा से सड़कों पर निकल आई थी।
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तेहरान रेडियो


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