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Date of publication : 21/12/2016 17:17
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मानवाधिकारों की मांग करने वाले कुछ देश वास्तव में मानवाधिकारों का सबसे अधिक दुरुपयोग करने वाले हैः ईरान

संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा में मानवाधिकार के संबंध में होने वाली बैठक में कुछ लाबियों के दबाव में ईरान विरोधी प्रस्ताव पारित हुआ जिसमें ईरान के भीतर मानवाधिकार की स्थिति पर टिप्पणी की गई।
विलायत पोर्टलः संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा में मानवाधिकार के संबंध में होने वाली बैठक में कुछ लाबियों के दबाव में ईरान विरोधी प्रस्ताव पारित हुआ जिसमें ईरान के भीतर मानवाधिकार की स्थिति पर टिप्पणी की गई। संयुक्त राष्ट्र संघ में ईरान के राजदूत ग़ुलाम हुसैन देहक़ान ने प्रस्ताव की आलोचना करते हुए कनाडा सहित प्रस्ताव पेश करने वाले देशों की लक्ष्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि यह बात बहुत घृणात्मक है कि कोई देश मानवाधिकारों के हनन में सबसे आगे हो और वह इस ईरान विरोधी हास्यास्पद प्रस्ताव का समर्थन करे। इस प्रस्ताव का एकमात्र लक्ष्य ईरान पर राजनैतिक दबाव डालना है। कनाडा, अमेरीका और ब्रिटेन जैसे देश जिन्होंने यह प्रस्ताव पेश किया था वास्तव में मानवाधिकारों का सबसे अधिक दुरुपयोग करते हैं। इन देशों को कोशिश यह रहती है कि इस प्रकार के क़दम उठाकर मानवाधिकार के क्षेत्र में अपने काले करतूतों से लोगों का ध्यान हटा दें। पश्चिमी देशों ने मानवाधिकार के विषय को उन देशों पर दबाव डालने का हथियार बना लिया है जो पश्चिम की नीतियों का समर्थन नहीं करते। इसी लिए ईरान ने इस प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है और कहा है कि यह शक्तियां केवल उसी समय तक जनता के चयन वाले विकल्पों का सम्मान करती हैं जब तक इसमें उनके स्वार्थ पूरे होते हों। यदि कोई राष्ट्र पश्चिमी दृष्टिकोण से हटकर कोई विकल्प चुन लेता है तो पश्चिमी की दृष्टि में उसने दंडनीय अपराध कर लिया है। लेकिन जब पश्चिमी देशों के घटकों की बात आती है तो लोकतंत्र और मानवाधिकार सब किनारे लगा दिए जाते हैं। पश्चिमी देश अपने घटकों का हर स्तर पर बचाव करते हैं चाहे लोकतंत्र और मानवाधिकार के संबंध में उनका रिकार्ड कितना ही ख़राब क्यों न हो। इसमें कोई संदेह नहीं कि ईरान विरोधी प्रस्ताव का लक्ष्य ईरानोफ़ोबिया फैलाना है। इस अभियान में कनाडा जैसे देश शामिल हैं जहां स्थानीय जातियों के अधिकारों का हनन सर्वविदित है। इस देश में रेड इंडियन्स तथा कालों के साथ बड़ा निर्दयतापूर्ण बर्ताव किया जाता है। मानवाधिकार का मुद्दा अंतर्राष्ट्रीय महत्व रखता है लेकिन आज की दुनिया में स्थिति यह है कि ग़ज़्ज़ा, और यमन में जिस तरह अमेरीका, कनाडा और ब्रिटेन के हथियारों से सऊदी अरब और इस्राईल बेगुनाह इंसानों ही नहीं बच्चों और महिलाओं की भी निर्ममता से हत्या कर रहे हैं और बार बार रिपोर्टें आने के बावजूद यह देश हथियारों की सप्लाई में कोई कमी नहीं कर रहे हैं।
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तेहरान रेडियो


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