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Date of publication : 20/12/2016 18:58
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फार्स खाड़ी के अरब देशों को अतीत की ग़लतियों से सबक़ लेने की ज़रूरत है।

फार्स खाड़ी की सहकारिता परिषद के महासचिव अब्दुल्लतीफ़ ने ईरान के बारे में एक विज्ञप्ति जारी की है। इस विज्ञप्ति में तेहरान पर निराधार आरोप लगाये गए हैं जो ईरान और क्षेत्र के संबंध में सऊदी अरब के राजनीतिक दृष्टिकोण के सूचक हैं।

विलायत पोर्टलः फार्स खाड़ी की सहकारिता परिषद के महासचिव अब्दुल्लतीफ़ ने ईरान के बारे में एक विज्ञप्ति जारी की है। इस विज्ञप्ति में तेहरान पर निराधार आरोप लगाये गए हैं जो ईरान और क्षेत्र के संबंध में सऊदी अरब के राजनीतिक दृष्टिकोण के सूचक हैं। इस विज्ञप्ति में ईरान पर सऊदी अरब, बहरैन, कतर और यमन सहित क्षेत्रीय देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप का आरोप लगाया गया है। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि फार्स खाड़ी की सहकारिता परिषद के सदस्य देशों को सऊदी अरब की नीतियों का अनुसरण करने की वजह से राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा की विभिन्न कठिनाइयों का सामना है। क्षेत्र भी आर्थिक और राजनीतिक संकटों का साक्षी है और क्षेत्र की बहुत सी समस्याओं और तनावों का ज़िम्मेदार सऊदी अरब है लेकिन फार्स खाड़ी की सहकारिता परिषद ने वास्तविकताओं को उल्टा दिखाने के साथ विश्व समुदाय से मांग की है कि वह क्षेत्र में शांति व सुरक्षा को चुनौती देने वाली ईरान की कार्यवाहियों को रोके। इसी तरह का भ्रमित रइवया इस बात का सूचक है कि फार्स खाड़ी के अरब देशों को अतीत की ग़लतियों से पाठ लेने की अत्यंत आवश्यकता है। फार्स खाड़ी की सहकारिता परिषद रचनात्मक सहकारिता करने के बजाये क्षेत्र में सदैव संकट उत्पन्न करने के प्रयास में रही है और वास्तविक चुनौतियों से मुकाबले की दिशा में उसने कभी भी गम्भीर क़दम नहीं उठाया। पूछना चाहिये कि फार्स खाड़ी की सहकारिता परिषद ने जायोनी शासन की भर्त्सना में कितनी विज्ञप्ति जारी की है? किस बैठक में उसने यमन या सीरिया युद्ध के संबंध में निष्पक्ष और वास्तविकता पर आधारित दृष्टिकोण अपनाया? फार्स खाड़ी की सहकारिता परिषद ने सदैव फूट डालने और क्षेत्र में अमेरिका और ब्रिटेन के हस्तक्षेप की दिशा में नया क़दम उठाया है। फार्स खाड़ी की सहकारिता परिषद की ओर से अभी हाल ही में ब्रिटेन की प्रधानमंत्री को दिये गए निमंत्रण को इसी दिशा में देखा जा सकता है। बहरहाल फार्स खाड़ी की सहकारिता परिषद की गतिविधियां इस बात की सूचक हैं कि उसका लक्ष्य क्षेत्रीय देशों के साथ ईरान के संबंधों को खराब करना है और निश्चित रूप से उसकी गतिविधियां कभी भी इन देशों की कठिनाइयों व चुनौतियों का समाधान नहीं करेंगी।
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तेहरान रेडियो


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