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Date of publication : 17/9/2016 17:54
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अलअज़हर के सुन्नी धर्मगुरु ने कहाः सऊदी अरब ने चुराया है “अहले सुन्नत वलजमाअत का नाम।”

मिस्र के एक मशहूर सुन्नी धर्मगुरु ने कहा है कि सऊदी अरब ने "अहले सुन्नत वलजमाअत" का नाम चुरा कर, सुन्नियों को काफ़िर बता रहे हैं।

विलायत पोर्टलः मिस्र के एक मशहूर सुन्नी धर्मगुरु ने कहा है कि सऊदी अरब ने "अहले सुन्नत वलजमाअत" का नाम चुरा कर, सुन्नियों को काफ़िर बता रहे हैं। पूरी दुनिया में सुन्नी मुसलमानों के मशहूर शिक्षा केन्द्र अलअज़हर के विद्वान और मिस्र के मशहूर धर्मगुरु शेख अहमद अश्शरीफ अलअज़हरी ने कहा है कि सारे मुसलमान इस बात पर सहमत हैं कि "अहले सुन्नत वलजमाअत" वास्तव में "अशाएरी" और " मा तोरीदूनी" हैं और वहाबियत के संस्थापक "मुहम्मद बिन अब्दुल वहाब" से पहले "इब्ने तैमिया" ने चरमपंथ की शुरुआत की थी। उन्होंने चेचनिया की राजधानी ग्रोज़नी में सुन्नी धर्मगुरुओं के हालिया सम्मेलन के बारे में कहा कि इस सम्मेलन के आयोजन की वजह यह थी कि सुन्नी धर्मगुरु इस नतीजे पर पहुंच चुके हैं कि "अहले सुन्नत वलजमाअत" का नाम चोरी हो गया है और अब "वहाबी" "अहले सुन्नत वलजमाअत" बन गए हैं। उन्होंने कहा कि यह नाम हम से डॅालरों और धन के ज़ोर पर छीना गया है और हमें उम्मीद थी कि वहाबी हम से यह नाम छीनने के बाद सुन्नी मुसलमानों के रास्ते पर चलेंगे लेकिन हुआ यह कि वहाबियों ने सभी किताबों और संस्थाओं में " अहले सुन्नत वलजमाअत " का नाम हम से छीन कर हमें ही बाहर निकाल दिया और चेचनिया में सुन्नी धर्मगुरुओं के हालिया सम्मेलन का मक़सद इस गलती को सुधारना और इस सिलसिले में की जाने वाली लापरवाही को खत्म करना था। मिस्र के मशहूर सुन्नी धर्मगुरु शेख अहमद अश्शरीफ अलअज़हरी ने कहा कि यह सब कुछ उस समय हुआ जब वहाबियों ने सत्ता संभाली और उन्हें धन और तेल मिल गया। उन्होंने कहा कि वहाबियों ने मुसलमानों को काफ़िर कहा और उसके बाद पूरे क्षेत्र में आतंकवाद और कट्टरपंथ सिर उभारने लगा। उन्होंने कहा कि "अद्दुररुस्सुन्निया" नामक किताब सऊदी अरब के वहाबियों की विचारधारा के अनुसार लिखी गई है और इस किताब के मुताबिक वहाबियों के अलावा पूरी दुनिया के मुसलमान काफ़िर हैं। मशहूर सुन्नी धर्मगुरु शेख अहमद अश्शरीफ अलअज़हरी ने कहा कि इस किताब में साफ़ तौर से मुसलमानों को "काफिर" कहा गया है और लिखा हुआ है कि मुहम्मद बिन अब्दुलवहाब ने उस्मानी और मिस्री काफ़िरों से युद्ध किया। उन्होंने कहा कि वहाबियों ने " तायफ" " मक्का" और " मदीना" नगरों के मुसलमानों पर हमला किया और उनका जनसंहार किया क्योंकि वह इन नगरों के मुसलमानों को "काफ़िर" समझते थे। उन्होंने कहा कि जो भी वहाबी मत की मूल किताब "अद्दुररुस्सुन्ना" को पढ़ेगा उसे पता चलेगा कि आईएसआईएल के आतंकवादी वहाबियों का नया रूप हैं और वहाबियों और आईएसआईएल के आतंकवादियों में 100 प्रतिशत समानता है।
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तेहरान रेडियो


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