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Code : 183368
Date of publication : 10/9/2016 9:47
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हज़रत इमाम मुहम्मद बाक़िर (अ.) और इस्लामी सिक्का

आपका मशहूर लक़ब (उपनाम) "बाक़िर" है और आपको यह उपनाम हज़रत रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे व आलिही वसल्लम ने दिया था। कर्बला में आपका बचपना था और आप अपने उस बचपने में उन सभी मुसीबतों में शामिल थे जो आपके पिदरे बुज़ुर्गवार (पिता) इमाम सज्जाद अलैहिस्सलाम और दूसरे अलवियों पर पड़े

विलायत पोर्टलः आपका मशहूर लक़ब (उपनाम) "बाक़िर" है और आपको यह उपनाम हज़रत रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे व आलिही वसल्लम ने दिया था। कर्बला में आपका बचपना था और आप अपने उस बचपने में उन सभी मुसीबतों में शामिल थे जो आपके पिदरे बुज़ुर्गवार (पिता) इमाम सज्जाद अलैहिस्सलाम और दूसरे अलवियों पर पड़े। जब आप अपने पिदर बुज़ुर्गवार की वफ़ात (मृत्यु) के बाद इमाम बने तो उस समय की हुकूमत से बिल्कुल अलग हो गए और उससे किसी भी तरह का कोई संपर्क नहीं रखा इसलिए आपने अपना सारा समय दीनी उलूम (ज्ञान) और इस्लाम की सही तस्वीर बयान करने में लगा दिया और पिछली अमवी हुकूमत के ज़माने में फ़िक़्ह व हदीस जिस पर मिट्टी जम गई थी उसे साफ़ कर दिया और उसे लोगों के सामने उसी तरह पेश किया जैसा उसे रसूले इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलिही वसल्लम ने बयान किया था।जबकि आपका उस समय के अधिकारियों और हुकूमत से बिल्कुल संपर्क नहीं था लेकिन जब भी उन्हें कोई मुश्किल और परेशानी होती थी तो उन समस्याओं को हल करने के लिए वह आपकी सेवा में हाज़िर होते थे, और इमाम अलैहिस्सलाम भी इस बारे में ज़रा भी संकोच से काम नहीं लेते थे, बल्कि उनकी समस्याओं को हल कर दिया करते थे और उन्हें उपदेश व नसीहत करते थे, इस्लाम और इस्लामी स्तम्भों की सुरक्षा करते थे।जैसा कि कुछ इतिहासकारों (Historian) ने लिखा है कि अब्दुल मलिक इब्ने मरवान का इमाम अलैहिस्सलाम से सलाह मशवरे के बाद सभी बर्तनों और कपड़ों को बंद करा दिया जिन पर मिस्र के कुछ ईसाइयों ने सिरयानी भाषा में अपना विश्वास व अक़ीदा "अब, इब्न और रूहुल क़ुद्स" छाप कर बाज़ारों में भेजा था।इसी तरीके से जब ख़लीफ़ा और रूम के राजा के बीच बातचीत हुई और ख़लीफ़ा, रूम के राजा को कोई मज़बूत जवाब न दे सका, इसलिए उसने खलीफा के प्रति कड़ा व्यवहार अपनाया और उसने दिरहम व दीनार पर रसूले इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलिही वसल्लम के लिए अपमानजनक शब्द लिख कर मुसलमानों के बाजार में भेजे क्योंकि उस ज़माने में दिरहम व दीनार रूम में बनाए जाते थे।जब अब्दुल मलिक ने हाल देखा तो इमाम अलैहिस्सलाम से सलाह करने पर मजबूर हो गया और इस संबंध में को सीरिया बुलाया, इसलिए इमाम अलैहिस्सलाम ने इस्लाम के हित की वजह से इस निमंत्रण को स्वीकार किया और सीरिया रवाना हो गए और जब अब्दुल मलिक ने आपके सामने मुश्किल बयान की तो आपने फ़रमाया कि उद्योगपतियों (Industrialist) को बुलाया जाए, ख़लीफ़ा ने सबको बुलाया, तब इमाम अलैहिस्सलाम ने लोगों को बताया कि किस तरह दिरहम व दीनार साँचा बनाएं, कैसे उनकी मात्रा निश्चित की जाए और कैसे उन पर कुछ लिखा जाए, इसलिए इमाम अलैहिस्सलाम ने इस तरीक़े से मुसलमानों को अपमान से बचा लिया और रूम के राजा को हार का सामना करना पड़ा।इमाम अलैहिस्सलाम के अनगिनत शागिर्द (शिष्य) थे आपकी मीरास और छोड़ी हुई सम्पति वह महान भंडार है जिस से तफ़सीर, फ़िक़्ह, हदीस, कलाम और इतिहास की किताबें भरी पड़ी हैं, आपकी शहादत ज़िल-हिज्जा 114 हिजरी में मदीना-ए-मुनव्वरा में हुई और आपको जन्नतुल बक़ीअ में दफ़्न किया गया।


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