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Code : 183219
Date of publication : 22/8/2016 20:50
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नहजुल बलाग़ा हज़रत अली (अ.) की दुनिया

कुछ नहजुल बलाग़ा को एक अदब (साहित्य) की किताब जानते हैं बल्कि ज़्यादा तर इसकी पहचान इसी रूप में है कि नहजुल बलाग़ा को किताबी रूप देने वाले ने इसी पहलू से मुख़्तलिफ़ ख़ुत्बों और कलमात को इकठ्ठा


विलायत पोर्टल जिस तरह से कुरआने करीम की एक अपनी दुनिया है उसी तरह नहजुल बलाग़ा की भी अपनी एक ख़ास दुनिया है क़ुरआन की दुनिया अभी तक पहचानी नहीं जा सकी है, सदियों से मुसलमान क़ुरआने करीम की तिलावत करते हैं उसे पढ़ते हैं उसकी तफ़सीर का अध्ययन करते हैं
और उसे याद भी करते हैं, लेकिन क़ुरआन का इलाही सिस्टम अभी तक सबकी निगाहों से ओझल है। इक्का दुक्का लोगों ने इस सिस्टम की हक़ीक़त व वास्तविकता को समझा है और इस बारे में कुछ बातें भी बयान की हैं लेकिन यहाँ पर हम यह बताना चाहते हैं कि नहजुल बलाग़ा को भी क़ुरआन की तरह सही तरह से नहीं पहचान गया है।देखने में नहजुल बलाग़ा को ऐसी किताब कहा जाता है जिसमें अमीरुल मोमेनीन (अ.) के ख़ुत्बे ,मकतूबात और हिकमतें लिखी हैं जिन्हें एक बहुत बड़े आलिम सय्यद शरीफ़ रज़ी (र.ह.) ने हिजरी सन की चौथी शताब्दी में जमा करके किताबी रूप दे दिया है अलबत्ता हज़रत अली (अ.) के कलाम और बयान केवल इसी किताब तक सीमित नहीं हैं बल्कि इससे कहीं ज़्यादा हैं और मुसतदरके नहजुल बलाग़ा नामी किताब में भी छप भी चुके हैं।
कुछ नहजुल बलाग़ा को एक अदब (साहित्य) की किताब जानते हैं बल्कि ज़्यादा तर इसकी पहचान इसी रूप में है कि नहजुल बलाग़ा को किताबी रूप देने वाले ने इसी पहलू से मुख़्तलिफ़ ख़ुत्बों और कलमात को इकठ्ठा किया है और इसका नाम भी अदबी पहलू से रखा है, उल्माए इस्लाम में से भी जिन्होंने इसकी तरफ़ ध्यान दिया है और इसके ख़ुत्बों से प्रभावित हुए हैं ज़्यादातर अहले अदब (साहित्यकार) हैं जिन्हें सारी अदबी किताबों में सबसे अनोखा और मज़बूत अदब, नहजुलबलाग़ा में दिखाई दिया। उन्होंने इसको स्वीकार भी किया है और उसे खुल्लम खुल्ला बयान भी किया है, उसके साहित्य की बारीकी को समझने वाले अदीबों ने अमीरुल मोमेनीन (अ.) के कलाम के बारे में कहा कि यह इंसान के कलाम से ऊपर और अल्लाह के कलाम से नीचे और कमतर है।
कुछ लोगों ने नहजुल बलाग़ा को अख़्लाक़ी और नैतिक पहलू से देखा है और इसे तक़वा व सदाचार का नमूना पाया है इसी वजह से हज़रत अली (अ.) के वह ख़ुत्बे जिनमें तक़वा, सदाचार और दुनिया से दूरी का बयान है उन पर ज़्यादा ध्यान दिया है।
 
 


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