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Date of publication : 16/8/2016 12:5
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ज़रा सोचें!! क्या हमारे अन्दर चिड़िया जितनी भी समझ नहीं??

जब अल्लाह के दुश्मन नमरूद नें अल्लाह के नबी जनाबे इब्राहीम अ. को जलाने के लिये आग जलाई तो बहुत से लोगों के साथ एक चिड़िया भी वहाँ थी। जब उसने देखा कि ज़मीन पर बसने वाले सबसे बुरे इन्सान नें इस ज़मीन के सबसे अच्छे इन्सान और अल्लाह के नबी जनाबे इब्राहीम अ. को आग में डाला है और सब लोग खड़े देख रहे हैं तो


विलायत पोर्टलः जब अल्लाह के दुश्मन नमरूद नें अल्लाह के नबी जनाबे इब्राहीम अ. को जलाने के लिये आग जलाई तो बहुत से लोगों के साथ एक चिड़िया भी वहाँ थी। जब उसने देखा कि ज़मीन पर बसने वाले सबसे बुरे इन्सान नें इस ज़मीन के सबसे अच्छे इन्सान और अल्लाह के नबी जनाबे इब्राहीम अ. को आग में डाला है और सब लोग खड़े देख रहे हैं तो उसे आश्चर्य भी हुआ दुख भी हुआ। यह देख कर उसने सोचा कि आग को बुझाकर जनाबे इब्राहीम को बचाया जाए! इसलिये बार बार जाती और अपनी चोंच में पानी लाकर आग पर डालती। किसी नें उसका मज़ाक़ उड़ाते हुए कहा: तुम जानती हो कि जिस आग में इब्राहीम को डाला गया है उसकी ऊँचाई आसमान को छू रही है। तुम्हारे चोंच भर पानी से उस आग पर क्या असर होगा? चिड़िया नें जवाब दिया: ठीक है कि मेरा चोंच भर पानी कुछ नहीं कर सकता लेकिन इस तरह मैं अपनी ज़िम्मेदारी तो पूरी कर सकती हूँ। कल अगर ख़ुदा नें मुझसे पूछ लिया कि जब मेरा दोस्त और मेरा नबी आग में था उस समय तूने क्या किया? तो मैं कह सकती हूँ कि जो मैं कर सकती थी वह किया!
क्या हम चिड़िया से भी गए गुज़रे हैं?
क्या हमारे अन्दर चिड़िया जितनी भी समझ नहीं है?
समाज में लगी बुराईयों की आग जिसमें लाखों, करोड़ों लोग जल रहे हैं क्या उसके लिये हमारे अन्दर इस चिड़िया के बराबर ज़िम्मेदारी का एहसास भी नहीं है?
क्या यह कहना सही है कि हम क्या कर सकते हैं?
सच में! अगर ख़ुदा नें हमसे भी पूछ लिया कि तुमने क्या किया तो हमारे पास क्या जवाब होगा?
कम से कम यह जवाब तो होना ही चाहिये: जो कर सकते थे वह किया! जितना कर सकते थे उतना किया!

इस कहानी के अंदाज़ से यही लगता है कि यह दास्तान सही नहीं है और केवल एक कहानी है लेकिन इसका नतीजा ज़रूर हमें सोचने पर मजबूर करता है कि हमारी ज़िम्मेदारी क्या है? और क्या हम अपनी ज़िम्मेदारी पर अमल कर रहे हैं?

इमाम सादिक़ अ. की एक हदीस में मेंढ़क का ज़िक्र मिलता है कि उसने आग बुझाने की कोशिश की थी और इसी लिए मेंढ़क को मारने से मना किया गया है।


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