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Date of publication : 19/7/2016 18:30
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इराक़ में सऊदी अरब के हस्तक्षेप का पर्दाफाश।

इराक़ में आतंकवादियों के समर्थन में सऊदी अरब की भूमिका का पर्दाफाश हो जाने के बाद संयुक्त राष्ट्रसंघ में इराक़ी राजदूत ने इस संघ से मांग की है कि वह आतंकवाद से मुकाबले के परिप्रेक्ष्य में विदेशियों द्वारा आतंकवादियों के समर्थन को बंद करने की ज़मीन हमवार करे।

विलायत पोर्टलः इराक़ में आतंकवादियों के समर्थन में सऊदी अरब की भूमिका का पर्दाफाश हो जाने के बाद संयुक्त राष्ट्रसंघ में इराक़ी राजदूत ने इस संघ से मांग की है कि वह आतंकवाद से मुकाबले के परिप्रेक्ष्य में विदेशियों द्वारा आतंकवादियों के समर्थन को बंद करने की ज़मीन हमवार करे। मोहम्मद अली हकीम ने सुरक्षा परिषद की बैठक में कहा कि यह बात किसी से छिपी नहीं है कि सऊदी अरब जैसे इलाक़े के कुछ अरब देशों के ग़ैर सरकारी संगठन इस देश की ख़ूफ़िया सेवा की मदद से इराक़ में आतंकवादियों की ज़रूरत के मूल आपूर्तिकर्ता हैं। इससे पहले सऊदी अरब के वक्फ़ विभाग ने यह क़बूल किया था कि इराक़ और सीरिया में सक्रिय तकफ़ीरी आतंकवादियों की ज़रूरतों के एक भाग की आपूर्ति अरब देशों के ग़ैर सरकारी संगठन और सऊदी अरब की कुछ मस्जिदों के इमाम कर रहे हैं। साथ ही सऊदी अरब के वक़्फ विभाग ने दावा किया था कि सरकारी संगठन इस बात पर नज़र रखने में असमर्थ हैं। संयुक्त राष्ट्रसंघ में इराक़ के राजदूत ने इस देश के आंतरिक मामलों में तुर्की और सऊदी अरब के हस्तक्षेप को बयान करते हुए सुरक्षा परिषद से मांग की है कि वह आतंकवाद से मुकाबले के परिप्रेक्ष्य में अंतरराष्ट्रीय प्रस्ताव को लागू करवाए और रियाज़ और अंकारा से मांग करे कि वे आतंकवादी गुट आईएसआईएल का वित्तीय समर्थन बंद करें। सऊदी अरब और तुर्की द्वारा इराक में समर्थन पर बग़दाद ऐसी स्थिति में आपत्ति जता रहा है जब दो वर्ष पूर्व सऊदी अरब के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस आतंकवादी गुट के प्रति खुल्लम खुल्ला अपने समर्थन का ऐलान किया था और यह वह समय था जब आतंकवादी गुट आईएसआईएल ने इराक़ की ज़मीन के बड़े हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया था। बहरहाल दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप, दूसरे देशों की सरकारों को बदलने और दूसरे देशों को अस्थिर करने पर आधारित सऊदी अरब जैसे देशों को अपनी नाकाम नीति को परिवर्तित करना चाहिये क्योंकि इस नीति का अब तक आतंकवाद के समर्थक देशों के लिए न सिर्फ़ उल्टा नतीजा रहा है बल्कि यमन, इराक़ और सीरिया जैसे देशों की तबाही की वजह भी बनी है।
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तेहरान रेडियो


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