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Code : 182906
Date of publication : 11/7/2016 17:36
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बहरैन में जनता का लगातार प्रदर्शन आले ख़लीफ़ा शासन की नाकामी का सबूत है।

बहरैन में जनता ने इस देश के वरिष्ठ शीया धर्मगुरु शैख़ ईसा क़ासिम की नागरिकता निरस्त किए जाने के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया। बहरैनी पत्रकार अहमद रज़ी को बिना कोई वजह बताए इस देश से बाहर निकलने से रोक दिया गया।


विलायत पोर्टलः इस देश में दमनकारी कार्यवाहियों में तेज़ी आने के बावजूद आले ख़लीफ़ा शासन की नाकामी का निशान है। बहरैन में जनता ने इस देश के वरिष्ठ शीया धर्मगुरु शैख़ ईसा क़ासिम की नागरिकता निरस्त किए जाने के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया। बहरैनी पत्रकार अहमद रज़ी को बिना कोई वजह बताए इस देश से बाहर निकलने से रोक दिया गया। बहरैन में आले ख़लीफ़ा शासन, लोगों की गिरफ़्तारी, उनका दमन करने यहां तक कि लोगों की नागरिकता रद्द करने जैसी कार्यवाही कर बहरैनी जनता को सता रहा है। बहरैन में आले ख़लीफ़ा शासन के इस देश की जनता के ख़िलाफ़ विभिन्न रूप में हिंसक व्यवाहर की रिपोर्टें सामने आई हैं, जिससे पता चलता है कि यह शासन जनता के ख़िलाफ़ किसी भी अपराध में किसा भी तरह का कोई सोच विचार नही करता। इस देश में हालिया महीनों में आले ख़लीफ़ा शासन की पुलिसिया नीति चिंताजनक हद तक कठोर हो गई है। जिससे बहरैन में घुटन का माहौल बढ़ गया है। लेकिन इसके बावजूद जनता अपनी जाएज़ मांग पर डटी हुई है। हक़ीक़त यह है कि बहरैन में जनक्रान्ति एक राष्ट्रीय क्रान्ति है जो हर तरह की सांप्रादायिक भावना से दूर है। इस देश में न सिर्फ़ शिया बल्कि सुन्नी समुदाय भी आले ख़लीफ़ा शासन के अत्याचार से परेशान है। आले ख़लीफ़ा शासन के क्रियाकलाप यह दर्शाते हैं कि यह शासन दमन करने की शैलियां अपनाने में चैंपियन है। यही वजह है कि दुनिया में बहरैनी शासन की पहचान एक दमनकारी शासन की है। बहरैन में आले ख़लीफ़ा शासन से जनता की नफ़रत की वजह यह है कि यह शासन आंतरिक स्तर पर जनता के नागरिक व राजनैतिक अधिकारों का हनन कर रहा है और विदेशी स्तर पर क्षेत्र में विदेशियों के हितों को पूरा करने ख़ास तौर पर अमेरीका के पास होने की नीति अपनाई है जिसके नतीजे में बहरैन में विदेशियों ने राजनैतिक, आर्थिक और फ़ौजी वर्चस्व जमा लिया है। ऐसे हालात के मद्देनज़र बहरैनी जनता ने इस देश के गृह मंत्रालय की तरफ़ से हर तरह के प्रदर्शन के आयोजन पर रोक लगाने के बावजूद, राजधानी मनामा को अपने प्रदर्शन का केन्द्र बना दिया है। बहरैन में जनता के प्रदर्शन के जारी रहने से, आले ख़लीफ़ा शासन के वजूद की वैधता का संकट पहले से ज़्यादा साफ़ हो गया है।
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तेहरान रेडियो


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