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Date of publication : 10/7/2016 17:57
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तकफ़ीरी आतंकियों का समर्थन करने वालों पर मुक़द्दमा चलाया जाएः सुन्नी धर्मगुरू

लेबनान में प्रतिरोध के धर्मगुरुओं के अंतर्राष्ट्रीय संघ के महासचिव माहिर हमूद ने दक्षिणी लेबनान के सैदा नगर में नमाज़े जुमा के ख़ुतबों में तकफ़ीरी आतंकियों की आर्थिक, सामरिक और संचारिक मदद करने वालों पर मु़क़द्दमा चलाने की मांग करते हुए आशा जताई कि जल्दी ही प्रतिरोध को कामयाबी मिलेगी।

विलायत पोर्टलः लेबनान के एक मशहूर सुन्नी धर्मगुरू ने तकफ़ीरी आतंकियों के समर्थकों पर मुक़द्दमा चलाए जाने की मांग की है। लेबनान में प्रतिरोध के धर्मगुरुओं के अंतर्राष्ट्रीय संघ के महासचिव माहिर हमूद ने दक्षिणी लेबनान के सैदा नगर में नमाज़े जुमा के ख़ुतबों में तकफ़ीरी आतंकियों की आर्थिक, सामरिक और संचारिक मदद करने वालों पर मु़क़द्दमा चलाने की मांग करते हुए आशा जताई कि जल्दी ही प्रतिरोध को कामयाबी मिलेगी। उन्होंने इसी तरह चिलकोट रिपोर्ट को एक नई त्रासदी बताते हुए कहा कि चिलकोट सात साल के बाद उसी नतीजे पर पहुंचे हैं जिसपर दुनिया के आज़ाद लोग पहले ही से ज़ोर दे रहे थे कि अमेरीका और ब्रिटेन के नेतृत्व में इराक़ के ख़िलाफ़ जंग का कोई क़ानूनी औचित्य नहीं था और यह इराक़ में सामूहिक विनाश के शस्त्रों की मौजूदगी की झूठी रिपोर्ट को बुनियाद बना कर शुरू किया गया था। लेबनान के इस सुन्नी धर्मगुरू ने कहा कि इराक़ जंग, इलाक़े में चरमपंथ फैलने की वजह बना और इसने अलक़ाएदा की विचारधारा को इक और नया मौक़ा दिया। उन्होंने कहा कि दावों के ख़िलाफ़ यह जंग आतंकवाद के ख़िलाफ़ नहीं थी बल्कि इसने आतंकवाद के फैलने का ही रास्ता हमवार किया गया। मालूम रहे कि साल 2003 की इराक़ जंग के बारे में चिलकोट रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने जनमत को धोखा देकर अमेरीका के साथ इराक़ पर हमला किया था।
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तेहरान रेडियो


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