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हर दौर में कर्बला के ज़ायरीन रहे हैं.....

कर्बला पैदल जाने वाले क़ाफ़िलों का सिलसिला इमामों के दौर से रहा है, हद तो यह है कि बनी उमय्या और बनी अब्बास के ज़ुल्म और अत्याचार के बावजूद इमाम हुसैन ...

हुसैन (अ.स.) आइए, दुनिया को कर्बला की फिर ज़रूरत है....

यज़ीद किसी शख़्स का नाम नहीं है बल्कि यज़ीद एक रवैये का नाम है और इसी तरह हुसैन (अ.स.) किसी एक शख़्स का नाम नहीं बल्कि एक मिशन, एक मक़सद, एक आइडियालॉज ...

घाटे का सौदा

उमर इब्ने साद के जहन्नम की तरफ़ बढ़ते क़दम उन सभी लोगों के लिए सबक़ हैं जो अपने दौर के हाकिमों और बादशाहों को ख़ुश करने के लिए अपने ज़मीर को थपक कर सु ...

विलायत और तौहीद का आपसी रिश्ता

इस्लाम की बुनियाद ही विलायत पर रखी गई है जैसाकि हदीस में ज़िक्र हुआ है कि इस्लाम की बुनियाद पांच चीज़ों पर है, नमाज़, ज़कात, रोज़ा, हज और विलायत।और इन ...

चलो कर्बला चलें...

ज़ालिमों ने हर दौर में अपनी हद से आगे जाकर इमाम हुसैन अ.स. की ज़ियारत से रोकने की जी तोड़ कोशिश की है लेकिन इमाम हुसैन अ.स. ने जिस अल्लाह के नाम और उस ...

इमाम हुसैन अ.स. की अज़ादारी अहले सुन्नत की निगाह में

इमाम हुसैन अ.स. और आपके वफ़ादार असहाब पर अज़ादारी करना केवल शियों से मख़सूस नहीं है बल्कि अहले सुन्नत भी आपकी शहादत पर ग़म को ज़ाहिर करते हैं, हालांकि ...

ज़ियारते आशूरा की फ़ज़ीलत

इमाम हुसैन अ.स. और कर्बला वालों की मारेफ़त और उनके मक़सद को समझने का एक बेहतरीन ज़रिया ज़ियारते आशूरा है जिसको हम सभी इन दिनों ताकीद के साथ पढ़ते हैं, ...

जनाब मुख़्तार की ज़िंदगी पर एक निगाह

अल्लामा इब्ने नुमा जनाब मुख़्तार के बारे में लिखते हैं, जनाब मुख़्तार ने बड़े बड़े कारनामे अपने नाम किए, वह ज़हीन, हाज़िर जवाब और ऊंची सोंच रखने वाले ...

सब्र और ज़ुल्म के मुक़ाबले डटे रहना भी कर्बला का एक पैग़ाम है

कर्बला वालों की ज़िंदगी में भी सब्र और ज़ुल्म के सामने डट कर खड़े रहना ही दिखाई देता है, एक मंज़र वह है कि जब इमाम हुसैन अ.स. ने शबे आशूर अपनी बैअत उठ ...

कर्बला वाले और हमारी ज़िम्मेदारियां

कर्बला वालों के पाक लहू ने पूरी दुनिया के इंसानों को अल्लाह की मारेफ़त का सबक़ सिखाया, नैतिकता, तहज़ीब और इस्लामी वैल्यूज़ को बचा लिया, शराफ़त को मौत ...

दुआ के क़ुबूल होने की शर्तें...

दुआ के क़ुबूल होने के लिए हर चीज़ से पहले दिल का गुनाहों से पाक होना ज़रूरी है, यानी पहले गुनाहों से तौबा करे गुनाहों की माफ़ी के लिए दुआ करे फिर दूसर ...

मुनाजाते शाबानिया इमाम ख़ुमैनी र.ह. की निगाह में

इमाम ख़ुमैनी र.ह. ने जगह जगह अपने बयान में मुनाजाते शाबानिया की अहमियत पर ज़ोर दिया है, आपने न केवल आम लोगों बल्कि सरकारी कर्मचारियों और उलमा को भी मु ...

माहे रमज़ान की तैयारी शाबान से करें....

माहे रमज़ान अपनी विशेषताओं की वजह से ख़ास अहमियत रखता है, जिसमें इंसान की ज़िदगी और आख़ेरत दोनों को संवारा जाता है, इसलिए अगर कोई इस मुबारक महीने के आ ...

इस्लाम में ख़ुलूस की अहमियत

ख़ुलूस का मतलब नीयत का शिर्क और दिखावे से पाक रखना है, हदीसों में बयान हुआ है कि ख़ुलूस का संबंध दिल से है उसके बारे में किसी सामने की चीज़ के जैसा फ़ ...

क्या इमाम ज़माना अ.स. की विलायत ख़त्म हो गई जो रहबर की विलायत को मानें?

इमाम ज़माना अ.स. के होते हुए क्या किसी और की विलायत कैसे हो सकती है तो ज़रा इसका जवाब दीजिए कि अल्लाह ने इस आयत में हिजरत करने वालों को एक दूसरे का वल ...

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