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फ़िलिस्तीन और विश्व समुदाय का विश्वासघात

अवैध राष्ट्र इस्राईल की स्थापना के बाद से अब तक फ़िलिस्तीनियों ने इस्राईली आतंकवाद और क़त्लेआम के अलावा अमन और शांति का मुंह भी नहीं देखा, ज़ायोनी दरि ...

ग़ुस्से और धमकी से बातचीत की मेज़ तक

उत्तरी कोरिया की अमेरिका से राष्ट्रपति से बातचीत का जो ख़बरें आ रही हैं उनमें तो अमेरिकी राष्ट्रपति, किम जोंग की क़ाबिलियत का कलमा पढ़ते दिखाई दे रहे ...

कठ मोलवियों और सियासतदानों की डुगडुगी

इल्म और अमल से ख़ाली कोई केवल टोपी शेरवानी पहन लेने में ही सारा इल्म समझता है तो कोई जुब्बा और दस्तार को पब्लिक में अपनी हैबत जमाने का ज़रिया समझता है ...

हज़रत सलमान का इस्लाम और ईमान

एक दिन किसी ने इमाम अली अ.स. से सलमान के बारे में सवाल किया, आपने फ़रमाया: उस पाक फितरत का क्या कहना उसकी फितरत हमारी फितरत से है उसकी रूह हमारी रूह स ...

शहादत

अल्लाह ने हुक्म दिया है कि ख़बरदार अल्लाह की राह में क़त्ल हो जाने वालों को मुर्दा ख़्याल भी मत करना वह ज़िंदा हैं और अल्लाह के यहां से रोज़ी पा रहे ह ...

मोहर्रम और सफ़र से इस्लाम ज़िंदा है

हमारी ज़िम्मेदारी है कि इस मोहर्रम और सफ़र के महीने में जो इस्लाम के ज़िंदा होने का महीना है कर्बला के शहीदों की मुसीबतों को याद करते हुए बातिल परस्तो ...

नमाज़ की अज़मत

नमाज़ का बुलंदियों की तरफ़ ही परवाज़ करना इस बात की निशानी है कि नमाज़ का संबंध इस दुनिया से नहीं है बल्कि किसी और दुनिया से है, इंसान मिट्टी के ढेले ...

इंसान और बंदगी

इबादत की दूसरी शान और अज़मत यह है कि इंसानों की पैदाइश का मक़सद बताया गया है और एलान हुआ कि "हमने इंसान और जिन्नात को केवल अपनी इबादत के लिए पैदा ...

अल्लाह का ज़िक्र और दिलों का आराम

बेचैनी और स्ट्रेस आमतौर से बेतुके ख़्यालों की वजह से पैदा होता है और यह बेतुके ख़्याल उसी समय पैदा होते हैं जब दिमाग़ में अल्लाह का ख़्याल और दिल में ...

बक़ी और क़ुद्स पर राजनीति क्यों?

बैतुल मुक़द्दस हो या जन्नतुल बक़ी दोनों की अहमियत अपनी अपनी जगह साबित है दोनों की पाकीज़गी अपनी जगह तय है और दोनों ही इस समय ज़ालिमों के क़ब्ज़े में ...

हज़रत ख़दीजा स.अ. का मर्तबा

हज़रत ख़दीजा के मर्तबे और उनकी शख़्सियत को मामूली आधार पर नहीं परखा जा सकता, क्योंकि उनकी अज़मत, फ़ज़ीलत और मर्तबे का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकत ...

शैतान तो क़ैद है फिर गुनाह क्यों.....

यानी हक़ीक़त में शैतान का क़ैद होना हर इंसान उसके रोज़े का उस पर पड़ने वाले असर से संबंधित है, इसलिए जो रोज़ा नहीं रखते या माहे रमज़ान और रोज़े के आदा ...

हज़रत ख़दीजा अ.स. इस्लामी इतिहास की अहम निशानी

हज़रत ख़दीजा की अज़मत, फ़ज़ीलत और उनकी महानता के लिए क्या यह कम है कि पैग़म्बर स.अ. ने उनका सम्मान करते हुए जब तक वह ज़िंदा रहीं दूसरी शादी नहीं की, औ ...

बहादुर ख़ानदान की बहादुर ख़ातून

इमाम अली अ.स. की शरीके हयात हज़रत फ़ातिमा ज़हरा स.अ. की शहादत को लगभग 15 साल का समय गुज़र चुका था, इमाम अली अ.स. ने अपने भाई अक़ील को जो ख़ानदान और नस ...

इंसान मौत के समय किन किन चीज़ों को देखता है?

मोमिन और काफ़िर जिन चीज़ों को भी ज़िंदगी के उस आख़िरी पल में देखेगा वह उसके आमाल के ही नतीजे में होगा, मोमिन और नेक अमल अंजाम देने वाला अल्लाह की कराम ...

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