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पैग़म्बर स.अ. की सीरत और इमाम ख़ुमैनी र.अ. की विचारधारा

जो लोग इस्लामी इंक़ेलाब के बारे में शक का शिकार हैं वह हक़ीक़त में पैग़म्बर स.अ. की सीरत को समझने में असफ़ल रहे हैं, और यह भी हक़ीक़त है कि जिस दिन पै ...

कमियां तलाश करने वाले

जो चीज़ इंसान को दूसरों की कमियां निकालने पर उभारती है वह एहसासे कमतरी यानी ख़ुद को सामने वाले से कम आंकना, घमंड, तकब्बुर और एहसासे बरतरी यानी ख़ुद को ...

मोमिन और दुनिया की मुसीबतें

मुसीबत इंसान के गुनाहों का कफ़्फ़ारा बन जाती है और इंसान को बिना हिसाब किताब के जन्नत तक पहुंचाती है और इससे बढ़िया और अच्छा कोई शरफ़ नहीं कि इंसान बि ...

ईरान में बाढ़ से भारी तबाही और इस्लामी देशों की ख़ामोशी

यही सैलाब और बाढ़ की तबाही इजराइल या किसी इस्लाम दुश्मन देश में आती तो सारा अरब मदद के लिए पहुंच जाता सारा यूरोप उनके साथ खड़ा होता और उन सारे लोगों क ...

अम्र बिल मारूफ़ और नही अन मुन्कर का असर ना होने पर क्या करें?

अगर एक बार में बात का असर और प्रभाव नहीं हो रहा तो अलग अलग तरह से समझा कर बात कही जाए,

नेक अमल क़ुबूल होने की शर्त हलाल रोज़ी है

हम अपने आपको मुसलमान कहते हैं तो जो चीज़ें हराम हैं तो क्या एक मुसलमान को उन चीज़ों को अंजाम देने चाहिए? ध्यान देने वाली बात है कि हलाल और हराम खाने प ...

मासूमीन अ.स. के हरम का अहले सुन्नत द्वारा सम्मान

साम्रज्यवादी ताक़तों की साज़िशों में से एक अहम साज़िश शिया सुन्नी के बीच फूट डालना है, और इसके लिए वह अरबों डॉलर का बजट ख़र्च कर रहे हैं और कुछ कमज़ ...

नबी और इमाम मासूम होने के बावजूद क्यों इस्तेग़फ़ार करते थे?

अल्लाह के सच्चे और पवित्र बंदे चाहे वह नबी इमाम की शक्ल में हों या आम आदमी की, वह अल्लाह की इस हद तक मारेफ़त और पहचान रखते हैं कि अगर सारे इंसान और जि ...

हक़ के रास्ते में हंसी उड़ाए जाने के समय क्या करें?

क़ुर्आन में सूरए मोतफ़्फ़ेफ़ीन की आयत नंबर 29 से 32 में ज़िक्र है कि मुजरिम और गुनहगार लोग अलग अलग प्रकार से मोमेनीन पर हंसते उनका मज़ाक़ उड़ाते और उन ...

इमाम अली अ.स. और हज़रत मीसम तम्मार

हज़रत मीसम ने इमाम अली अ.स. से इतना इल्म हासिल किया था कि इमाम अ.स. के सहाबियों में इल्म में सबसे ज़्यादा अहमियत रखते थे, फिर आपने इमाम अली अ.स. की शह ...

सहीफ़-ए-सज्जदिया और दुआ की तालीम

इमाम सज्जाद अ.स. दुआ और अल्लाह से ख़िताब और उसकी बारगाह में दुआ करने के सिलसिले में सारे मुसलमानों के उस्ताद थे, इसलिए कि अगर इमाम अ.स. न होते तो मुसल ...

क्या हर सही बात कहनी चाहिए?

हक़ बात का छुपाना हराम है, लेकिन हक़ बात को उसके सही समय अनुसार ही कहना चाहिए, बहुत सारी हक़ बातें अगर बिना सोचें समझे कही जाएँ तो लाभ तो दूर हानिकार ...

इंसान अपने कामों में आज़ाद है या मजबूर?

अल्लाह ने इंसान को आज़ाद पैदा किया है, और उसे अपने कार्यों के चयन का अधिकार दिया है, हाँलाकि कुछ लोगों का कहना है कि इंसान अपने कामों में मजबूर है लेक ...

हमारी दुआ क्यों क़बूल नहीं होती जब कि अल्लाह ने क़बूल करने का वादा किया है?

दुआ के क़बूल होने की एक शर्त परिस्थिति भी है, अल्लाह हकीम और सब से अधिक परिस्थितियों का जानने वाला है, इसलिए वह हमारी परिस्थिति के अनुसार ही हमारी दुआ ...

हज़रत उम्मुल बनीन अ.स.

आपके फ़ज़ाएल में से एक इमाम अली अ.स. की बीवी होना है, ज़ाहिर है हर औरत इमाम अली अ.स. की बीवी होने के क़ाबिल नहीं हो सकती, इमाम अली अ.स. ने हज़रत ज़हरा ...

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