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माहे शाबान के आमाल

माहे शाबान में हर शबे जुमा दो रकअत नमाज़ पढ़े जिसकी हर रकअत में सूरए हम्द के बाद 70 बार सूरए तौहीद पढ़े और नमाज़ के बाद 100 बार सलवात पढ़े, ताकि अल्ल ...

माहे शाबान में रोज़े की अहमियत

इमाम सादिक़ अ.स. से किसी ने माहे रजब के रोज़े के बारे में पूछा तो आपने फ़रमाया शाबान के रोज़े से क्यों ग़ाफ़िल हो? आपसे सवाल किया गया कि माहे शाबान मे ...

इस्लाम में युद्ध की अवधारणा और उसकी ज़रूरत

ह युद्ध जो अत्याचारियों और पापियों के मुक़ाबले अपने बचाव और असहाय और कमज़ोरों की मदद के लिए लड़ा जा रहा है इसको अल्लाह ने अपने रास्ते में युद्ध कहा है ...

शहीद हुजजी की बीवी का इंटरव्यू

जिस दिन आग़ा मोहसिन को जाना था वह अपने वालेदैन से ख़ुदा हाफ़िज़ी के लिए गए, उन्होंने नियत की थी कि अगर उनकी इस सफ़र पर जाने की दुआ पूरी हो गई तो वह अप ...

अहले सुन्नत के चारों इमामों के नज़दीक मुसलमान को काफ़िर ठहराना हराम

किसी भी क़िबले वाले (मुसलमान) को किसी गुनाह की वजह से काफ़िर मत कहो, और किसी के ईमान पर शक न करो, अम्र बिल मारूफ़ और नहि अनिल मुन्कर करो, और ध्यान रह ...

क़ुर्बानी करने का राज़

शरीयत में क़ुर्बानी पर इस हद तक ज़ोर दिया गया है कि इमाम अली अ.स. फ़रमाते हैं कि अगर लोग ईदे क़ुर्बान के दिन क़ुर्बानी का सवाब जान जाएं तो क़र्ज़ ले क ...

हक़ीक़ी अज़ादारी और हक़ीक़ी अज़ादार

अज़ादारी का सबसे पहला और सबसे कम दर्जा यह है कि इंसान का दिल इमाम हुसैन अ.स. पर ढ़ाई गई मुसीबतों को सुन कर उदास हो, और उदासी उसकी ज़ाहिर न हो, इसी तरह ...

हक़ीक़ी अज़ादार कौन?

अगर हम ने आशूरा के पैग़ाम और उसके मक़सद को गंभीरता से लिया होता और इमामों द्वारा बताए गए तरीक़ों के अनुसार अज़ादारी मनाई होती तो आज कर्बला के इंक़ेलाब ...

कर्बला वालों की पांच अहम विशेषताएं

कर्बला वालों की एक और अहम विशेषता अल्लाह की इबादत और बंदगी है, जैसाकि हबीब इब्ने मज़ाहिर के बारे में कहा जाता है कि वह रात इशा की नमाज़ के बाद से सुबह ...

कर्बला में औरतों का किरदार

सबसे अहम और मुश्किल काम कर्बला की औरतों का यह था कि कर्बला का पैग़ाम और इमाम हुसैन अ.स. की इन क़ुर्बानियों के मक़सद को सभी लोगों तक पहुंचाए, हालांकि य ...

रिश्वत का वयक्तिगत और समाजिक नुक़सान

बहुत से लोग ऐसे होते हैं जिनको रिश्वत के लेन देन के हराम होने के बारे में जानते हैं, और शुरू में रिश्वत लेने और देने वाले से नाराज़ भी होते हैं लेकिन ...

नहजुल बलाग़ा की अहमियत ईसाई विद्वानों की निगाह में

कोई भी इतिहासकार और लेखक हो और उसमें चाहे कितनी ही प्रतिभा और साहस क्यों न पाया जाता हो और हज़ारों पेज ही लिख कर क्यों न हो लेकिन वह इमाम अली अ.स. की ...

मौत कितनी तरह की होती है

मौत एक ऐसी सच्चाई है जिसको किसी भी धर्म का मानने वाला क्यों न हो लेकिन वह मौत का इंकार करता नहीं दिखाई देता, या यूं कहा जाए इस धरती पर अल्लाह का इंकार ...

हमारे आमाल पर हमारे खानपान का असर

नेक अमल की तौफ़ीक़ हलाल और जाएज़ निवाले से पैदा होती है, क्योंकि हलाल निवाला और नेक अमल दोनों का ज़िक्र इस आयत में एक साथ आया है जिस से मालूम होता है ...

जुआ

एक माहिर जुवारी ने न्यूयॉर्क टाइम्स के रिपोर्टर को इंटरव्यू देते हुए कहता है कि मैं इस तरह इस जाल में फंसा हुआ था कि दिल चाहता था या इस जाल से तुरंत ब ...

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