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मुश्किलों के मुक़ाबले में इल्म और ईमान का किरदार

इस तरह कि ईमान इंसान को रूहानी और नफ़्सानी परेशानियों के समय उसे अंदर से सुकून और चैन देता है और इल्म इंसान को सैलाब, बीमारियों, ज़लज़ला और दूसरी आपदा ...

सत्तर मील की दूरी और सात सवाल

वह कौन सी चीज़ है जो समंदर से ज़्यादा बे नियाज़ है?आपने जवाब में फ़रमाया: क़नाअत करने वाला समंदर से ज़्यादा बे नियाज़ है।

हज़रत ज़हरा स.अ. और विलायत की हिफ़ाज़त आयतुल्लाह ख़ामेनई की निगाह में

अहलेबैत अ.स. से दिली लगाव मुसलमानों की मुश्किलों को आसान बना देता है और ज़िंदगी में इज़्ज़त और तरक़्क़ी मिलती है।

आईएसआईएस का ख़ात्मा तो हो गया लेकिन वह नाबूद होने के लिए नही उठे थे!!

NSA के एडवर्ड स्नोडन ने अधिकारिक तौर पर स्वीकार किया था कि ISIS पश्चिमी ख़ुफ़िया एजेंसियों में शहद की मक्खियों के नाम से मशहूर था, हिलेरी क्लिंटन ने अ ...

क़ासिम सुलैमानी अब भी ज़िंदा हैं

कौन था आख़िर क़ासिम सुलेमानी?वह अपने आप में एक लश्कर था और हर जंग का ज़ख़्म अपने दिल में सजाए बातिल और इंसानियत के दुश्मनों के मुक़ाबले डटा हुआ था।न अ ...

जनरल क़ासिम सुलेमानी कौन थे?

यह भी एक अटल सच्चाई है अगर मेजर जनरल क़ासिम सुलेमानी और इंजीनियर अबू मेहदी जैसे जियाले न होते तो आज हमारे सामने कई जन्नतुल बक़ी होती, इसलिए कि कर्बला, ...

हमारा दुश्मन कौन!!

कुछ लोग नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वालों को देश का दुश्मन कह रहे हैं जबकि ऐसा नहीं है, यह विरोध करना तो उनका देश और संविधान से मोहब्बत की ...

हमारे ख़ौफ़ और ख़ौफ़े ख़ुदा

हम अल्लाह से अगर डरते हैं तो दुनिया के नुक़सान के लिए (हमारे ख़्याल में बस यही जहन्नुम है) या डरते हैं तो दुनिया के फ़ायदे के लिए कि कहीं छूट न जाए... ...

कमज़ोरी या हिकमत

यह हक़ हज़रत ज़हरा स.अ. का था इसलिए अपने हक़ को वापस मांगना उनका हक़ था और न मिलने की सूरत में ऐलान कर देतीं कि जो हुकूमत पैग़म्बर स.अ. के हुक़ूक़ छीन ...

दुआ के आदाब

अगर तुम यह चाहते हो कि अल्लाह तुम्हारी हर दुआ पूरी कर ले तो सारे लोगों से मायूस हो कर केवल अल्लाह को अपनी उम्मीद का मरकज़ क़रार दो और जब तुम्हारे दिल ...

शादी

शहवत की रस्सी ज़्यादा मज़बूत दिखाई देती है क्योंकि शहवत एक ऐसी चीज़ है जो हर इंसान के अंदर पाई जाती है जबकि बहुत बार ऐसा देखा गया बहुत से इंसान ऐसे है ...

मालिक-ए-अश्तर

ऐ माविया कहो तो इस ख़त को मौला के पास ले जाऊं और कहो तो ख़ुद जवाब दे दूं, अगर तेरे लश्कर की तादाद सितारों की तरह है तो मेरे लश्कर में अली सूरज की तरह ...

कामयाबी क्या है?

सबसे बड़ी अच्छाई क्या है?आपने फ़रमाया: अच्छा अख़लाक़, सब्र और विनम्रता सबसे बड़ी नेकी और अच्छाई है।

इंसानियत का सम्मान

आज के दौर में भी देख लीजिए धर्म के नाम पर जाति के नाम पर लोग एक दूसरे की जान के प्यासे हैं, कहीं पर इस्लाम की आड़ लेकर कट्टरता दिखाने वाला गुट सामने आ ...

इमाम हुसैन अ.स. की ज़ियारत पर न जाने वालों का अफ़सोस

क़यामत के दिन कोई भी ऐसा नहीं होगा जो यह अफ़सोस न कर रहा हो कि काश मैंने भी इमाम हुसैन अ.स. की ज़ियारत का शरफ़ हासिल किया होता

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